बहराइच - सीतापुर को जोड़ने वाला चहलारी घाट पुल बना सेल्फी केन्द्र : बारिश में प्राकृतिक सौंदर्य, सेल्फी और चोखा बाटी ने बढ़ाया आकर्षण
बहराइच - सीतापुर को जोड़ने वाला चहलारी घाट पुल बना सेल्फी केन्द्र
बारिश में प्राकृतिक सौंदर्य, सेल्फी और चोखा बाटी ने बढ़ाया आकर्षण
बहराइच/ उत्तर प्रदेश के बहराइच और सीतापुर जिले को जोड़ने वाला चहलारी घाट इन दिनों लोगों के बीच एक नया सेल्फी स्पॉट बनकर उभर रहा है। खासकर बरसात के मौसम में यह घाट प्रकृति प्रेमियों, युवाओं और परिवारों के लिए घूमने-फिरने और स्वाद का आनंद लेने का एक बेहतरीन ठिकाना बन चुका है।
घाघरा नदी पर बना यह घाट अपने आप में प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा उदाहरण पेश करता है। जब बारिश के बाद नदी में पानी का बहाव तेज होता है और आसमान में बादल मंडराते हैं, तो घाट का दृश्य किसी चित्रकार की कल्पना जैसा लगता है। यही वजह है कि लोग यहां आकर सेल्फी और ग्रुप फ़ोटो खींचना नहीं भूलते।
यहां आने वाले पर्यटकों को केवल सुंदर नज़ारे ही नहीं, बल्कि स्थानीय व्यंजन – चोखा बाटी भी खूब लुभाता है। घाट के पास कई स्थानों पर चोखा बाटी के ठेले और दुकानें सजी रहती हैं, जहां गरमा-गरम बाटी, बैगन का चोखा और ताजा दाल परोसी जाती है। ऊपर से घी की खुशबू और स्वाद, खाने वालों को बार-बार यहां आने पर मजबूर कर देती है।
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बारिश शुरू होते ही चहलारी घाट पर आने वाले लोगों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। सप्ताहांत और छुट्टी के दिनों में यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है। युवा वर्ग खासकर सोशल मीडिया पर फ़ोटो अपलोड करने के लिए यहां आना पसंद करता है।
चहलारी घाट की यह बढ़ती लोकप्रियता क्षेत्रीय पर्यटन के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यदि प्रशासन थोड़ी सी और कोशिश करे — जैसे साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था, बैठने के लिए शेड, पीने का पानी और पार्किंग की सुविधा — तो यह घाट राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।
फिलहाल,चहलारी घाट बहराइच-सीतापुर केवल एक नदी पर बना पुल नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता, सेल्फी प्रेम और पारंपरिक स्वाद का संगम बन चुका है, जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है
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