सिद्धार्थनगर में फॉरेंसिक साइंस पर कार्यशाला आपराधिक न्याय व्यवस्था में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका पर चर्चा : जनपद न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव-तृतीय की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार
सिद्धार्थनगर : फॉरेंसिक साइंस पर कार्यशाला आयोजित आपराधिक न्याय व्यवस्था में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका पर हुई चर्चा
जनपद न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव-तृतीय की अध्यक्षता में लोहिया कला भवन में हुआ सेमिनार, न्यायिक पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को विशेषज्ञों ने दी जानकारी
सिद्धार्थनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को लोहिया कला भवन में “आपराधिक न्यायशास्त्र में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका” विषय पर कार्यशाला एवं सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव-तृतीय ने की।
कार्यशाला में फॉरेंसिक विज्ञान के विशेषज्ञ प्रो. डॉ. आदर्श कुमार निदेशक, डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, उप निदेशक और डॉ. उदय प्रताप सिंह, वैज्ञानिक अधिकारी ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। इसमें न्यायिक प्रशासनिक अभियोजन पुलिस चिकित्सा विभाग और लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम से जुड़े अधिकारियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को फॉरेंसिक विज्ञान की आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व और आपराधिक मामलों की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में उनकी उपयोगिता से अवगत कराना था।
नए आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर चर्चा
कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रो. डॉ. आदर्श कुमार ने नए आपराधिक कानूनों और आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक मेडिसिन एवं विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता 2023 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के संदर्भ में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से जांच करने पर विवेचना अधिक तथ्यपरक और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलती है।
घटनास्थल प्रबंधन और साक्ष्यों के संरक्षण की जानकारी
द्वितीय सत्र में डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक बैलिस्टिक्स और घटनास्थल प्रबंधन के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपराध के बाद घटनास्थल को सुरक्षित रखना साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकना तथा उनका विधिवत संकलन और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने साक्ष्यों की अभिरक्षा श्रृंखला (चेन ऑफ कस्टडी) बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
दम घुटने से होने वाली मौतों की जांच पर व्याख्यान
तृतीय सत्र में वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. उदय प्रताप सिंह ने दम घुटने से होने वाली मौतों के विभिन्न प्रकारों, चिकित्सकीय परीक्षण और पोस्टमार्टम के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृत्यु के वास्तविक कारण का निर्धारण करने में चिकित्सकीय परीक्षण घटनास्थल की परिस्थितियों और वैज्ञानिक विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
निष्पक्ष न्याय के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जरूरी
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान अपराध की जांच तक सीमित नहीं है बल्कि सत्य की खोज निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित करने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके प्रभावी उपयोग के लिए पुलिस अभियोजन चिकित्सा और न्यायिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
कार्यक्रम में अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन पर भी जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार इस तरह की कार्यशालाएं न्यायिक प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने तथा आमजन को निष्पक्ष एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने में सहायक हैं।
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