हजारों वर्षों से मुक्ति का माध्यम है श्रीमद्भागवत महापुराण : सीएम योगी : गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, सीएम योगी बोले – कथा जीवन को पतन से उत्थान की ओर ले जाती है।
गोरखपुर, 4 सितंबर।
मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण 5000 वर्षों से कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम है। इसकी कथा जीवन के वास्तविक ज्ञान को उद्घाटित करती है और पतन से उत्थान की ओर ले जाती है।
वे गुरुवार अपराह्न गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में शुरू हुए श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
जीवन के वास्तविक ज्ञान का मार्ग
सीएम योगी ने कहा कि जब व्यक्ति स्वार्थवश अपने विवेक से शून्य हो जाता है, तब श्रीमद्भागवत कथा जैसी परंपराएं उसे दुर्गति से बचाकर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करती हैं। यह कथा न केवल आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है बल्कि जीवन की नश्वरता का अनुभव कराती है।
व्यासपीठ पूजन और शोभायात्रा
कथा आरंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में वेदपाठी छात्रों के वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और बैंडबाजे के साथ महापुराण की पोथी शोभायात्रा निकाली गई। कथा स्थल पर अखंड ज्योति स्थापित कर मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ की पूजा की।
गोरक्षपीठ की परंपरा और अभीष्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ का उद्देश्य सदैव लोक कल्याण से राष्ट्र कल्याण रहा है। पीठ के आचार्यों ने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक धरातल पर उतारकर समाज को सही दिशा दी है। सनातन और भारत के कल्याण में ही सबका कल्याण निहित है।
कथा व्यास का प्रवचन
पहले दिन कथा व्यास जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य जी महाराज (परिधान पीठ, गोपाल मंदिर, अयोध्या धाम) ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि यह कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने वाली है, जो जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का सर्वोत्तम साधन है।
उन्होंने बताया कि कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा ही मानव जीवन को पाप और संकट से उबारकर मंगलमय बनाती है। संस्कृत भाषा मात्र भाषा नहीं बल्कि भारत की अभिलाषा है, जो पूरी दुनिया को सुखमय जीवन का मार्ग दिखाती है।
संत समाज का संबोधन
जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि जब-जब सनातन पर संकट आया, गोरक्षपीठ ने संत समाज को एकजुट कर समाज को सही दिशा दी।
स्वामी अवधेश दास जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म का संदेश मनुष्य को मनुष्य बनाने का है।
श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति
इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, ब्रह्मचारी दासलाल जी महाराज, काशी के जगद्गुरु संतोष दास ‘सतुआ बाबा’, देवीपाटन के महंत मिथिलेश नाथ सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, पूर्व विधायक अतुल सिंह, पूर्व महापौर सीताराम जायसवाल, मुख्य यजमान अवधेश सिंह व बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पूजन कार्य विद्यापीठ के वेदाचार्य डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने कराया और संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।
कथा का कार्यक्रम
यह श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी और इसका समापन 10 सितंबर को होगा।
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