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संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना: गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी, डीएम दीपक मीणा करेंगे अंतिम घोषणा : 54 सैम्पल्स का परीक्षण कर तीन सर्वश्रेष्ठ सैम्पल्स चयनित, बुनकर समुदाय में उत्सुकता

गोरखपुर | 28-Sep-2025 05:45 AM | 47 |
गोरखपुर
54 सैम्पल्स का परीक्षण कर तीन सर्वश्रेष्ठ सैम्पल्स चयनित, बुनकर समुदाय में उत्सुकता

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने और उनके उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने के उद्देश्य से चलाई जा रही संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के तहत गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब जिलाधिकारी दीपक मीणा अंतिम निर्णय लेकर विजेताओं की घोषणा करेंगे।

डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर गठित टीम में एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव के साथ अपर एसडीएम सदर सुदीप तिवारी शामिल थे। टीम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राप्त कुल 54 सैम्पल्स का गहन परीक्षण किया। एडीएम सिटी ने इनमें से तीन सर्वश्रेष्ठ सैम्पल्स का चयन कर डीएम को भेजा है, जिन पर जिलाधिकारी अंतिम फैसला करेंगे।

इस चयन प्रक्रिया में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग राजकुमार और टेक्सटाइल इंस्पेक्टर चेत सिंह ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उन्होंने आवेदन प्राप्ति, संकलन और सैम्पल्स के परीक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई।

संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना में परिक्षेत्रीय और राज्य स्तरीय दोनों स्तरों पर पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। परिक्षेत्र स्तर पर प्रथम पुरस्कार 20,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15,000 रुपये और तृतीय पुरस्कार 10,000 रुपये निर्धारित हैं। प्रत्येक परिक्षेत्र में तीन-तीन पुरस्कार दिए जाएंगे, जिससे पूरे प्रदेश में कुल 39 बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा।

राज्य स्तरीय पुरस्कारों का चयन प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत बुनकरों के साथ-साथ डिजाइनर या मास्टर बुनकर भी आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई संयुक्त रूप से आवेदन करता है, तो दोनों के लिए अलग-अलग आवेदन-पत्र और सैम्पल संलग्न करना अनिवार्य है।

गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुनकर समुदाय उत्सुकता से डीएम दीपक मीणा की घोषणा का इंतजार कर रहा है। यह योजना न केवल बुनकरों को सम्मान और प्रोत्साहन देगी, बल्कि हथकरघा उद्योग में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार को भी बढ़ावा देगी। साथ ही, पारंपरिक शिल्प और बुनकरी कला को संरक्षित रखते हुए इन्हें नई पहचान मिलेगी और युवाओं में हथकरघा के प्रति लगाव भी बढ़ेगा।

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