"समर्थ उत्तर प्रदेश - 2047" : बिजली निजीकरण के विरोध में संघर्ष समिति का ऐलान : संघर्ष समिति ने कहा – सस्ती और सुरक्षित बिजली के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में रहना जरूरी, निजीकरण के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
गोरखपुर, 4 सितंबर।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी “समर्थ उत्तर प्रदेश - विकसित उत्तर प्रदेश - 2047” विजन पोर्टल का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बिजली का निजीकरण रोककर इसे सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने घोषणा की कि वह शीघ्र ही पोर्टल पर अपना विस्तृत प्रस्ताव दर्ज करेगी। समिति ने कहा कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष और अभियान निरंतर जारी रहेगा।
संघर्ष समिति की मुख्य बातें
समिति के पदाधिकारियों – राघवेंद्र कुमार सिंह, योगेश यादव, विनय कुमार मल्ल, अखिलेश मल्ल, भोला प्रसाद, सीबी उपाध्याय, इस्माइल खान, पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन, प्रभुनाथ प्रसाद, संगम लाल मौर्य, संदीप श्रीवास्तव, करुणेश त्रिपाठी, रमेश कुमार सिंह, विपिन सिंह, प्रेम कुमार जित्तू, राजेश मौर्या, अतुल रॉय, सतेन्द्र सहगल, जयराम गुप्ता, प्रवीण कुमार, युधिष्ठिर गंगवार, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह, कौशलेंद्र त्रिपाठी एवं सुशील चौरसिया आदि ने कहा कि किसानों, गरीबों और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए विजन 2047 में बिजली का सार्वजनिक क्षेत्र में बने रहना अत्यंत आवश्यक है।
पाँच मुख्य कारण जिनसे सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली आवश्यक
1. सस्ती बिजली का हक – किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर बिजली मिलती रही है, लेकिन निजी कंपनियां घाटा उठाकर बिजली नहीं देंगी।
2. लागत में अंतर – सरकारी बिजली उत्पादन घरों की दर 4.17 रुपये/यूनिट है जबकि निजी क्षेत्र से खरीदी गई बिजली 7 से 19 रुपये/यूनिट तक महंगी है।
3. महंगे करारों का बोझ – निजी उत्पादन घरों के साथ 25-25 साल के महंगे करार हैं, जबकि अब सौर ऊर्जा जैसी सस्ती बिजली उपलब्ध है।
4. सेवा बनाम व्यवसाय – सार्वजनिक क्षेत्र बिजली को सेवा मानता है जबकि निजी क्षेत्र में यह व्यवसाय है। निजीकरण से बिजली की दरें आसमान छू सकती हैं।
5. राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू – बिजली नेटवर्क साइबर सुरक्षा से जुड़ा है। इसे निजी हाथों में देना बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब पोर्टल पर अपना सुझाव दर्ज किया जाएगा, तो इन बिंदुओं के साथ-साथ और भी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्ताव दिया जाएगा।
विरोध आंदोलन जारी
समिति ने बताया कि निजीकरण के खिलाफ जारी आंदोलन का आज 281वां दिन था और प्रदेशभर में सभी जिलों में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
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