गोरखपुर में हाबर्ट तटबंध पर बने नए रेग्युलेटर, बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत : राप्ती नदी की बाढ़ से सुरक्षा और बेहतर यातायात सुविधा के लिए हाबर्ट तटबंध को बनाया जा रहा फोरलेन
गोरखपुर। योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा गोरखपुर में बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में राप्ती नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक हाबर्ट तटबंध को फोरलेन सड़क के रूप में विकसित करने के साथ-साथ पुराने रेग्युलेटरों की जगह नए आधुनिक रेग्युलेटर स्थापित किए गए हैं। इस परियोजना के पूरा होने से शहर को बाढ़ से सुरक्षा मिलने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था में भी बड़ी राहत मिलेगी।
जानकारी के अनुसार राप्ती नदी के बाएं तट पर ब्रिटिश काल में निर्मित लगभग 3.9 किलोमीटर लंबे हाबर्ट तटबंध का चौड़ीकरण किया जा रहा है। पहले इसकी चौड़ाई लगभग सात मीटर थी, जिसे अब लोक निर्माण विभाग द्वारा 25 मीटर चौड़ा कर फोरलेन मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के समय शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा नागरिकों को वैकल्पिक और सुगम यातायात मार्ग उपलब्ध कराना है।
वहीं सिंचाई विभाग ने तटबंध पर स्थित पांच दशक पुराने रेग्युलेटरों को हटाकर नए रेग्युलेटरों का निर्माण कराया है। ड्रेनेज खंड, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद गौतम के अनुसार लगभग 30.28 करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि बॉक्स ड्रेन बनाकर नए रेग्युलेटर स्थापित किए गए हैं, जिससे बारिश और बाढ़ के दौरान जलनिकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और शहर में जलभराव की समस्या कम होगी।
रेग्युलेटरों पर लगाए गए गेट सिंचाई विभाग के कार्यशाला खंड द्वारा तैयार किए गए हैं। इसके अलावा सभी आठ रेग्युलेटरों के नालों पर आधुनिक ‘ट्रेस रैक’ भी लगाए जाएंगे। मजबूत लोहे की जालियों वाले इन ट्रेस रैक की मदद से नालों के रास्ते आने वाला ठोस कचरा, प्लास्टिक और मृत पशु सीधे नदी में नहीं जा पाएंगे। इससे नदी को प्रदूषित होने से बचाने में मदद मिलेगी और स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी।
सिंचाई विभाग के अनुसार डोमिनगढ़, बहरामपुर, इलाहीबाग, मिर्जापुर, बसंतपुर नरकटिया, घसियारी, हांसूपुर राजघाट और ट्रांसपोर्टनगर स्थित सभी आठ रेग्युलेटरों का सिविल निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही इन पर गेट लगाने का यांत्रिक कार्य भी संपन्न हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद गोरखपुर की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और शहरवासियों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा।
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