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रंगोत्सव की गंगोत्री : रंगों में सजी संवेदना, सृजन और संस्कृति का उत्सव : गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय में छात्राओं ने कला के माध्यम से समाज, संस्कृति और संवेदना का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया

गोरखपुर | 09-Nov-2025 01:41 AM | 47 |
गोरखपुर
गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय में छात्राओं ने कला के माध्यम से समाज, संस्कृति और संवेदना का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया

गोरखपुर। गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय, गोरखपुर का परिसर शुक्रवार को रंग, भावनाओं और सृजनशीलता के उत्सव में डूबा दिखाई दिया। “गंगोत्री रंगोत्सव–2025” के अंतर्गत आयोजित “चित्रकला प्रतियोगिता — सृजन और संवेदना का संगम” ने छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा, कलात्मक दृष्टि और समाज के प्रति संवेदनशील सोच को एक ही मंच पर उजागर कर दिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद एवं समाजसेवी श्रीमती रीना त्रिपाठी ने कहा — “कला केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती है। जब कोई कलाकार अपनी तूलिका से भावनाएँ उकेरता है, तो वह चित्र नहीं, एक विचार, एक संवेदना गढ़ता है।” उनके प्रेरक विचारों ने छात्राओं के हृदय में नई चेतना का संचार किया।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने कहा कि गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संवेदनशील, सृजनशील और जागरूक नागरिकों का निर्माण करने का एक सशक्त संस्थान है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि “कला के माध्यम से अपने भीतर की रोशनी समाज तक पहुँचाना ही सच्ची शिक्षा है।”

इस आयोजन की प्रेरणाशक्ति डॉ. श्रुति त्रिपाठी रहीं, जिन्होंने अपने सृजनशील नेतृत्व से पूरे आयोजन में प्राण फूँक दिए। उन्होंने कहा — “रंगों की भाषा सबसे सशक्त होती है — जो शब्दों से नहीं कहा जा सकता, उसे कला सहज कह जाती है।”

कार्यक्रम के संचालन में श्रीमती दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी, श्रीमती निधि त्रिपाठी और पूर्व सैनिक श्री हरीश मणि त्रिपाठी की भूमिका सराहनीय रही।

तकनीकी समन्वय और प्रस्तुति का दायित्व श्री उत्कर्ष त्रिपाठी ने कुशलता से निभाया, जिन्होंने तकनीक और कला का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।

आयोजन में महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र की गरिमामयी उपस्थिति ने उत्सव को विशेष महत्व प्रदान किया। उन्होंने कहा — “जब शिक्षा कला से जुड़ती है, तभी मानव निर्माण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।”

कार्यक्रम में गंगोत्री देवी नर्सिंग कॉलेज की श्रीमती लोरीटा याकूब, प्राचार्य प्रकाश चौधरी और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी भी उपस्थित रहे। डॉ. त्रिपाठी ने कहा — “कला मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों का आधार है। जिस समाज में रंग और सृजन जीवित रहते हैं, वह समाज कभी नीरस नहीं होता।”

समापन पर मुख्य अतिथि और प्राचार्या ने विजेता छात्राओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए। पूरा सभागार तालियों की गूंज और मुस्कुराते चेहरों से जगमगा उठा।

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