बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका में नजर आए जिलाधिकारी : श्यामपट्ट पर कराया गणित का सवाल
बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका में नजर आए जिलाधिकारी, श्यामपट्ट पर कराया गणित का सवाल
देवरिया, 12 अगस्त। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बुधवार को जिले के विभिन्न विकासखंडों के परिषदीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति संतोषजनक मिली। जिलाधिकारी ने शिक्षकों को बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने और निपुण लक्ष्य हासिल करने पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने विकासखंड भटनी के प्राथमिक विद्यालय गांगी, भलुअनी के प्राथमिक विद्यालय पड़ौली तथा देवरिया विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय मुजहना भटपुरवां का निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से संवाद किया और उनकी पढ़ाई का स्तर परखा। बच्चों को निपुण लक्ष्य और संदर्शिका के अनुरूप पढ़ाया जाता हुआ पाया गया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी स्वयं एक कुशल शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने श्यामपट्ट पर गणित से संबंधित प्रश्न लिखकर बच्चों से हल कराया। बच्चों ने सवालों के सही जवाब दिए, जिस पर जिलाधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त की। एक कक्षा में उन्होंने बच्चों के बीच नीचे बैठकर पुस्तक पढ़वाई और बच्चों की पठन क्षमता को परखा। बच्चों द्वारा सही ढंग से पाठ पढ़ने पर उन्होंने शिक्षकों की सराहना की।
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों में निपुण लक्ष्य और निपुण तालिका पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक बच्चे निर्धारित दक्षताओं को जल्द हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि जिले के सभी विद्यालयों और विकासखंडों को शीघ्र निपुण बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों से उन्होंने कहा कि निपुण तालिका और संदर्शिका के अनुरूप पठन-पाठन सुनिश्चित करें।
आंगनबाड़ी केंद्र पर कम मिली बच्चों की उपस्थिति
निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने विकासखंड गौरी बाजार के पोखरभिंडा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भी जायजा लिया। यहां बच्चों की उपस्थिति कम पाई गई। इस पर उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) को आंगनबाड़ी कार्यकत्री को प्रशिक्षण दिलाकर और अधिक सक्षम बनाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को ‘पहल’ पुस्तक के माध्यम से उनकी उम्र और क्षमता के अनुरूप गतिविधियों से जोड़ते हुए सीखने का अवसर दिया जाए। इससे पहली कक्षा में प्रवेश के समय बच्चों में बुनियादी दक्षताएं विकसित रहेंगी और वे आगे चलकर निपुण बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।
उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति के साथ उनकी सीखने की क्षमता पर भी लगातार नजर रखी जाए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक अपनी भूमिका को जिम्मेदारी और समर्पण के साथ निभाएं, तभी जिले को शिक्षा के क्षेत्र में निपुण बनाया जा सकेगा।