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“सड़क हादसे और बिखरते परिवार” विषय पर संगोष्ठी : पत्रकार समिति ने सड़क सुरक्षा के प्रहरी बने डॉक्टरों व पुलिस अधिकारियों को किया सम्मानित

गोरखपुर | 18-Oct-2025 09:57 PM | 47 |
गोरखपुर
पत्रकार समिति ने सड़क सुरक्षा के प्रहरी बने डॉक्टरों व पुलिस अधिकारियों को किया सम्मानित

गोरखपुर। शहर के शास्त्री चौक स्थित संकुल भवन में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के तत्वावधान में “सड़क हादसे और बिखरते परिवार” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य था—सड़क दुर्घटनाओं को केवल हादसा नहीं, बल्कि सामाजिक त्रासदी के रूप में समझते हुए सामूहिक जिम्मेदारी तय करना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे राजेश पांडेय (आईपीएस), नोडल अधिकारी, पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (यूपीडा)। अध्यक्षता समिति अध्यक्ष अरविंद राय ने की, जबकि विशिष्ट अतिथियों में एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी उत्तरी जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और एसपी ट्रैफिक राजकुमार पांडेय शामिल रहे।

संगोष्ठी में सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान बचाने वाले डॉ. रवि राय, डॉ. वी.के. सुमन, डॉ. एस.पी. त्रिपाठी तथा आईटीएमएस की उप निरीक्षक पूजा को “सड़क सुरक्षा प्रहरी सम्मान” से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों एवं पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

अध्यक्ष अरविंद राय ने कहा, “सड़क हादसे किसी व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को उजाड़ देते हैं। हाल ही में मेरे भतीजे का एक्सीडेंट हुआ था, लेकिन चिकित्सकों ने रात 4 बजे ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। ऐसे प्रहरी ही समाज की असली ताकत हैं।” उन्होंने कहा कि “सुरक्षा के नियम कानून नहीं, संस्कार होने चाहिए।”

गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि “हाईवे पर गलत दिशा में आने वाले वाहन और अचानक सड़क पर उतर आने वाले पशु सबसे बड़े खतरे हैं। थकान और नींद में ड्राइविंग भी भारी नुकसान पहुंचाती है। ट्रैफिक पुलिस को केवल चालान काटने तक सीमित न रहकर सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।”

एसपी ट्रैफिक राजकुमार पांडेय ने कहा, “लोग 500 रुपये चालान भरने को तैयार हैं, लेकिन उतने ही रुपये का हेलमेट खरीदने से हिचकते हैं। कानून की जिम्मेदारी जितनी पुलिस की है, उतनी ही जनता की भी।” उन्होंने मोबाइल फोन के प्रयोग और तेज रफ्तार को हादसों का सबसे बड़ा कारण बताया।

एसपी उत्तरी जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि “अपराधों में जितनी मौतें होती हैं, उससे साढ़े चार गुना ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में मरते हैं। दुर्घटना भी हत्या जितनी गंभीर त्रासदी है।” उन्होंने “गोल्डन ऑवर” यानी दुर्घटना के एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने कहा, “हेलमेट से बाल बिगड़ना या सीट बेल्ट से कपड़े की क्रीज खराब होना बहाना नहीं होना चाहिए। जीवन से बड़ा कुछ नहीं।”

मुख्य वक्ता राजेश पांडेय ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने भी सड़क सुरक्षा पर सख्ती बढ़ाई है। नींद या नशे में ड्राइविंग 80% दुर्घटनाओं की वजह बनती है। चौड़ी सड़कें तभी उपयोगी हैं जब जिम्मेदारी भी उतनी ही चौड़ी हो।”

कार्यक्रम के अंत में समिति ने संकल्प लिया कि पत्रकार समिति, प्रेस क्लब और एसोसिएशन मिलकर शहर में “रोड सेफ्टी जागरूकता अभियान” चलाएंगे, जिसमें स्कूलों में कार्यशालाएं, हेलमेट वितरण और नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएंगे।

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