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Delhi News: अल-फलह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर-17 : जहां रच रहा था जिहादी नेटवर्क, दिल्ली-अयोध्या-लखनऊ थे निशाने पर

दिल्ली | 20-Nov-2025 12:46 AM | 11 |
दिल्ली
जहां रच रहा था जिहादी नेटवर्क, दिल्ली-अयोध्या-लखनऊ थे निशाने पर

विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टर: रविंद्र आर्य | फरीदाबाद – दिल्ली

फरीदाबाद की प्रसिद्ध अल-फलह यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। विश्वविद्यालय की बिल्डिंग नंबर–17 से देश को अस्थिर करने वाले मजहबी षड्यंत्रों की मीटिंग होने का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी कमरे में बैठकर दिल्ली, अयोध्या और लखनऊ जैसे सांस्कृतिक-धार्मिक शहरों को निशाना बनाने की प्लानिंग बनाई जाती थी।

सूत्रों का कहना है कि यह पूरी संरचना ISI हेडक्वार्टर की तरह ऑपरेट होने वाला एक खास ईकोसिस्टम था—जहां पढ़ाई के नाम पर संवेदनशील युवाओं की पहचान, ब्रेनवॉश और भर्ती का काम वर्षों से चल रहा था।

25 साल से फरार हमूद सिद्दीकी गिरफ्तार: चिटफंड घोटाले से जिहादी नेटवर्क तक

इस पूरे नेटवर्क का बड़ा नाम हमूद सिद्दीकी, आखिरकार हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।
हमूद, अल-फलह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद का सगा भाई है और पिछले 25 साल से फरार था। चिटफंड स्कीम के नाम पर करोड़ों की ठगी के बाद वह देश से गायब हो गया था, लेकिन जांच में सामने आया कि उसके ठगी के पैसे का इस्तेमाल कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों और नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा था।

“पढ़ाई नहीं, प्लानिंग”— आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका था परिसर

जांच अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी के कई विभागों में भर्ती और ब्रेनवॉश का एक सुनियोजित मॉडल तैयार किया गया था। कुछ तथाकथित समाजसेवी और बुद्धिजीवी लगातार यह नैरेटिव चलाते रहे कि
“इन लोगों को पढ़ाओ-लिखाओ, तभी सुधरेंगे।”

लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलटी निकली—

पढ़-लिखकर वही लोग तकनीकी तौर पर और खतरनाक बन रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं पढ़े-लिखे युवाओं में से कुछ डॉक्टर, लैब टेक्निशियन और शोधार्थी लोगों की जान बचाने के बजाय #राइसिन जैसे घातक जैविक ज़हर तैयार करने की कोशिश कर रहे थे—जो कुछ ही मिलीग्राम में लाखों लोगों की हत्या कर सकता है।

“एक हाथ में कुरान, एक हाथ में कंप्यूटर”— तकनीक का दुरुपयोग

डॉ. परविंदर सिंह विश्व शांति राजदूत, संयुक्त राष्ट्र एवं अध्यक्ष, विश्व बौद्ध महासंघ बताते है की कट्टरपंथी प्रचारक अकसर यह भ्रम फैलाते रहे कि “तकनीकी ज्ञान और मजहबी शिक्षा साथ होगी तो समाज का उत्थान होगा”, लेकिन बम, कोडिंग और एन्क्रिप्टेड संचार में माहिर यह नेटवर्क साबित करता है कि—

तकनीक + कट्टरता = समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा

फैज-ए-इलाही मस्जिद कनेक्शन: जिहादी उमर के पीछे दिखा संदिग्ध व्यक्ति गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास आतंकी उमर के पीछे घूम रहे एक संदिग्ध को पकड़ा।
उसके पास से 9एमएम MM के कारतूस बरामद हुए हैं, और हथियार की तलाश अभी भी जारी है।
यह गिरफ्तारी अल-फलह यूनिवर्सिटी नेटवर्क से कितनी जुड़ी है, इसकी जांच एजेंसियाँ अब लिंक-जोड़ने में लगी हैं।

“अल-फलाह” नाम क्यों चुना गया? आतंकियों का पैटर्न एक जैसा

“अल-फलाह” शब्द अरबी में सफलता, उन्नति और मुक्ति के अर्थ में आता है।
सकारात्मक धार्मिक अर्थ होने के कारण कट्टरपंथी संगठन इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं ताकि—

* संस्थान पर पवित्रता का आवरण चढ़ जाए

* आम लोगों को भ्रमित किया जा सके

* गतिविधियाँ बिना शक के चलती रहें

यह पैटर्न जिहादी संगठनों में नया नहीं है। “अंसार”, “खैर”, “इस्लाह”, “फलाह”, “हिकमत” जैसे शब्दों का उपयोग कर वे धार्मिक वैधता का मुखौटा लगा देते हैं।

अल-फलह यूनिवर्सिटी में बिल्डिंग नंबर 17 कोई साधारण मीटिंग हॉल नहीं था—यह फरीदाबाद में छिपे एक पूरे ISI-शैली के नेटवर्क का दिमाग था।
हमूद सिद्दीकी की गिरफ्तारी, राइसिन षड्यंत्र, कारतूस बरामदगी, मस्जिद लिंक और धार्मिक शब्दों के दुरुपयोग ने यह साबित कर दिया है कि—
भारत के खिलाफ कट्टरमूलवादी नेटवर्क शिक्षा संस्थानों के भीतर से भी ऑपरेट कर रहे हैं, और इनका लक्ष्य सिर्फ एक—हिंदू समाज और राष्ट्र को कमजोर करना।

सूर्य सागर महाराज की विचारधारा मे कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरे को अब खुलकर समझना होगा

इसी क्रम में एक और गंभीर मामला सामने आया है। गुजरात के जैन गुरू सूर्य सागर महाराज जी बताते हैं कि गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में स्थित एक दरगाह से भारी मात्रा में देशी हथियार बरामद किए गए हैं। हज़रत कच्छी पीर दरगाह के मुजावर से पुलिस ने विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट के बाद जारी हाई अलर्ट के चलते गिर सोमनाथ पुलिस ने मूल द्वारका बंदरगाह क्षेत्र में एक बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया। एसपी जयदीपसिंह जाडेजा के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में 2 DYSP, 6 PI, 7 PSI, SOG, LCB और बॉम्ब डिस्पोज़ल स्क्वॉड समेत 120 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे।

तलाशी के दौरान SOG टीम को दरगाह परिसर से कुल्हाड़ी, काटो और तलवार जैसे देशी हथियार मिले। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिल्ली की घटना के बाद तटीय इलाकों में सुरक्षा और गश्त और अधिक कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रहेंगे, ताकि किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

सूर्य सागर महाराज का कहना है कि हाल की घटनाएँ समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। वे कहते हैं कि कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरे को अब खुलकर समझना और उसके प्रति सतर्क रहना आवश्यक हो गया है। उनका मानना है कि कई बार समाज चुप रह जाता है जिससे कट्टर तत्वों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए आवश्यक है कि लोग कानून के दायरे में रहते हुए, तथ्यात्मक जानकारी और प्रमाणों के माध्यम से समाज को जागरूक करें, ताकि किसी भी प्रकार के चरमपंथ, हिंसा या षड्यंत्र से राष्ट्र और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

महाराज यह भी कहते हैं कि महिलाओं सहित समाज के सभी वर्गों को सुरक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकजुटता से जुड़ी चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका जोर है कि कट्टरपंथ और हिंसात्मक मानसिकता के प्रति सजग रहना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

डॉ. परविंदर सिंह संदेह फ़रीदाबाद की अल-फलह यूनिवर्सिटी से जुड़े मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा यात्रा में ज़हर मिलाने की योजना थीं

राइसिन साजिश के खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए सूर्य सागर महाराज का कहना है कि यह घटना समाज को यह समझने पर मजबूर करती है कि कट्टरपंथी मानसिकता किस हद तक जाकर हिंसा की योजना बना सकती है। उनका कहना है कि ऐसे तत्व मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें किसी भी प्रकार का नैतिक या मानवीय मूल्य प्रभावित नहीं करता। महाराज का मत है कि इस प्रकार के ज़हरीले हमले कायरतापूर्ण तरीके हैं, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकते।

बाबा बागेश्वर धाम की यात्रा में शामिल होने आए USA अमरीका के डॉ. परविंदर सिंह बताते हैं कि फ़रीदाबाद की एक यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा यात्रा में ज़हर मिलाने की योजना का संदेह जताया गया था। डॉ. सिंह का आरोप है कि यह साजिश यात्रा शुरू होने से पहले ही पुलिस की जानकारी में थी, पर खुलासा यात्रा फ़रीदाबाद से निकलने के बाद किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो सैकड़ों लोगों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।

डॉ. सिंह और महाराज दोनों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन ओर आमजन को अधिक सतर्क और ज़िम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए, ताकि किसी भी विचारधारात्मक कट्टरपंथ या हिंसात्मक षड्यंत्र को समय रहते रोका जा सके।

फ़रीदाबाद न्यूज़ के मुख्य संपादक धर्मेंद्र प्रताप का अल फलाह यूनिवर्सिटी का ख़ुलासा

फ़रीदाबाद न्यूज़ के मुख्य संपादक धर्मेंद्र प्रताप का कहना है कि अल फलाह स्थानीय यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के फ़रार होने की जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात उभरकर आई है कि करीब 15 कश्मीरी डॉ. संदिग्ध लोग परिसर से लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में चल रही छापेमारी के दौरान लगभग 200 मुस्लिम डॉ. के भी नहीं मिलने की सूचना है।

धर्मेंद्र प्रताप का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस आशंका की जाँच कर रही हैं कि इनमें से कुछ लोग भविष्य में कथित रूप से स्लीपर सेल या ओवरग्राउंड वर्कर की तरह, बाहरी असामाजिक नेटवर्क के लिए सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक एजेंसियों की ओर से अभी किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्कता बढ़ाकर तथ्यों की गहराई से जांच कर रही हैं।

रविंद्र आर्य 
(विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं।)

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