कांट–जलालाबाद हाईवे पर आवारा पशुओं का आतंक : क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का कर रहा इंतजार
शाहजहांपुर। सावन के पवित्र माह में कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन सुरक्षा के तमाम दावे कर रहा है। जगह-जगह पुलिस बल, बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई है। लेकिन इन्हीं दावों के बीच कांट–जलालाबाद हाईवे की हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।
हाईवे पर दिन-रात झुंड के झुंड आवारा पशु खुलेआम घूमते और सड़क के बीचों-बीच बैठे दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों और कांवड़ियों के बीच ये पशु हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए पशुओं से टकराने से बाल-बाल बचे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी मौन है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कांवड़ यात्रा के दौरान हर छोटे-बड़े सुरक्षा इंतजाम पर प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, तो आखिर आवारा पशुओं को हाईवे से हटाने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित विभागों ने इस खतरे को नजरअंदाज कर दिया है, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई होगी?
यदि सावन में हजारों श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजर रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा की वास्तविक जिम्मेदारी कौन निभाएगा? क्या प्रशासन केवल कागजी व्यवस्थाओं तक सीमित है, जबकि जमीन पर हाईवे मौत का जाल बनता जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से तत्काल अभियान चलाकर हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने, नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल नहीं होगा