रीजेंसी हॉस्पिटल गोरखपुर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सेवाओं का विस्तार
गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। गोरखपुर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल ने अपने न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभाग का विस्तार करते हुए अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू करने का दावा किया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अब ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या अन्य महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी, क्योंकि अधिकांश आधुनिक न्यूरो सेवाएं अब एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
अस्पताल के अनुसार यहां 24×7 न्यूरो इमरजेंसी, समर्पित स्ट्रोक क्लिनिक, अत्याधुनिक जांच सुविधाएं, माइक्रोस्कोपिक एवं एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में अब तक 250 से अधिक सफल न्यूरोसर्जरी की जा चुकी हैं, जो क्षेत्र के मरीजों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती हैं।
अस्पताल ने हाल ही में दो जटिल मामलों में सफलता मिलने की जानकारी साझा की। पहले मामले में 40 वर्षीय मरीज, जो लंबे समय से कमर दर्द और पैरों में सुन्नपन से परेशान था, उसकी एल4-एल5 पीआईवीडी (स्लिप डिस्क) और लम्बर कैनाल स्टेनोसिस की सफल सर्जरी की गई। अस्पताल के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज को राहत मिली और अगले ही दिन छुट्टी दे दी गई।
दूसरे मामले में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 30 वर्षीय मरीज का सफल ब्रेन ऑपरेशन किया गया। मरीज की खोपड़ी की हड्डी धंस गई थी, जिससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ गया था। अस्पताल के मुताबिक वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई।
कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय ने कहा कि लगातार कमर दर्द, पैरों में सुन्नपन या अचानक स्ट्रोक के लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि समय पर जांच और उपचार से आज कई जटिल न्यूरो रोगों का सफल इलाज संभव है।
वहीं कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मुकुंद अग्रवाल ने बताया कि स्ट्रोक, मिर्गी और पार्किंसन जैसी बीमारियों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ स्थायी विकलांगता के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर के प्रवक्ता संदीप शर्मा ने बताया कि अस्पताल का उद्देश्य पूर्वांचल के लोगों को विश्वस्तरीय न्यूरो चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।