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सिंदूर का पौधा लगाकर कुलपति ने किया मियावाकी वन का उद्घाटन : पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ विश्वविद्यालय परिसर में विकसित हुआ 7000 पौधों वाला हरित मियावाकी वन

गोरखपुर | 07-Nov-2025 08:26 AM | 47 |
गोरखपुर
पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ विश्वविद्यालय परिसर में विकसित हुआ 7000 पौधों वाला हरित मियावाकी वन

गोरखपुर। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने वन विभाग के सहयोग से दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति पर आधारित घना वन विकसित किया है। इस “मियावाकी वन” का उद्घाटन कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सिंदूर का पौधा लगाकर किया।

यह मियावाकी वन कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से स्थापित किया गया है। मियावाकी पद्धति जापानी वन वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित तकनीक है, जिसमें सीमित स्थान पर देशी पेड़-पौधों को सघन रूप में लगाया जाता है। इस तकनीक से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कुछ ही वर्षों में प्राकृतिक जंगल का स्वरूप ले लेते हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में तैयार इस हरित वन में 50 से अधिक देशी प्रजातियों के करीब 7000 पौधे लगाए गए हैं। इनमें बेल, सीताफल, कचनार, सिंदूर, पलाश, अमलतास, नीम, आम, जामुन, अर्जुन और इमली जैसे वृक्ष शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, चमेली, कनेर, गुड़हल, मोगरा जैसे फूलदार पौधे और ब्राह्मी, तुलसी, शतावरी, मुलेठी तथा खस जैसे औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं।

उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि “विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता मानता है। यह मियावाकी वन न केवल परिसर की हरियाली बढ़ाएगा, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन, अनुसंधान और प्रकृति से जुड़ने का एक जीवंत प्रयोगशाला बनेगा।” उन्होंने कहा कि यह वन आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत सिद्ध होगा और विश्वविद्यालय के सौंदर्य में भी वृद्धि करेगा।

जिला वन अधिकारी विकास यादव ने भी कार्यक्रम में विशेष रूप से भाग लिया और कहा कि विश्वविद्यालय में यह परियोजना एक आदर्श पहल है। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में वन विभाग और विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से अन्य हरित परियोजनाएं भी प्रारंभ की जाएंगी, जिससे परिसर का सौंदर्यीकरण और पर्यावरणीय समृद्धि दोनों बढ़ेंगे।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. अनुभूति दुबे और सह-समन्वयक डॉ. अमित उपाध्याय ने बताया कि यह परियोजना छात्रों में पर्यावरणीय चेतना और जिम्मेदारी का भाव जगाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है।

इस अवसर पर प्रो. दिव्या रानी सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. टी.एन. मिश्रा, डॉ. ओमप्रकाश सिंह, डॉ. मनीष पांडेय, डॉ. आशीष शुक्ला, डॉ. हरिशचंद्र पांडेय, डॉ. वंदना सिंह समेत अनेक शिक्षक व अधिकारी उपस्थित रहे।

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