गोरखपुर में सात मिनट तक बादल फटने जैसी स्थिति, वर्षा की तीव्रता 105 मिमी/घंटा दर्ज : विश्वविद्यालय के लिडार व वेदर स्टेशन से हुई माप, वैज्ञानिकों ने बताया- जलवायु परिवर्तन का असर
गोरखपुर, 16 सितम्बर।
गोरखपुर का मौसम मंगलवार को सभी को चौंका गया। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में स्थापित लिडार और वेदर स्टेशन से पता चला कि सात मिनट तक वर्षा की तीव्रता 105 मिमी प्रति घंटा रही।
भौतिकी विभाग के प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी और डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद के अनुसार, मौसम विज्ञान की परिभाषा के मुताबिक, जब एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश होती है तो उसे क्लाउडबर्स्ट (बादल फटना) कहा जाता है। यदि वर्षा 50 मिमी तक होती है तो उसे फ्लैश फ्लड की स्थिति माना जाता है।
शोध छात्रा मिनाक्षी सिंह ने बताया कि कुल 34 मिनट में लगभग 38 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान बादलों की ऊँचाई 100 से 300 मीटर के बीच रही। इस तरह की तेज बारिश अक्सर विनाशकारी परिणाम लाती है और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का कारण बनती है।
डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वातावरण में नमी की अधिकता और वायुमंडलीय अस्थिरता जैसी स्थितियाँ इन चरम मौसमीय घटनाओं को और सामान्य बनाती जा रही हैं। ऐसे में क्लाउडबर्स्ट जीवन, संपत्ति और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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