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गाज़ियाबाद के पतला निवाड़ी मोदीनगर में पशु अस्पताल की बदहाली उजागर | सुविधाओं की भारी कमी : इलाज में लापरवाही और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल

गाजियाबाद | 07-Nov-2025 09:34 AM | 300 |
गाजियाबाद
इलाज में लापरवाही और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल

गाज़ियाबाद जिले के मोदीनगर क्षेत्र के पतला निवाड़ी गांव स्थित पशु अस्पताल की बदहाली अब ग्रामीणों की सहनशक्ति से बाहर होती जा रही है। गांव के बुजुर्गों, किसानों और पशुपालकों ने अस्पताल की जमीनी हकीकत मीडिया के सामने रखी, जिससे स्पष्ट हुआ कि यहां वर्षों से सुविधाओं का संकट बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त दवाइयाँ उपलब्ध हैं और न ही डॉक्टर समय पर अपनी ड्यूटी निभाते हैं, जिसके कारण पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अस्पताल में आपातकालीन दवाओं की भारी कमी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। अक्सर ऐसा होता है कि बीमार या घायल पशु को लेकर किसान अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां न तो इलाज मिल पाता है और न ही कोई डॉक्टर मौजूद होता है। मजबूरी में कई पशुपालक निजी चिकित्सकों का रुख करते हैं, जहां इलाज महंगा होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है। समय पर उपचार न मिलने से कई पशुओं की जान पर भी खतरा मंडराता रहता है।

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि अस्पताल की इमारत जर्जर हालत में है। बरसात के समय अस्पताल के अंदर पानी जम जाता है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। साफ-सफाई की स्थिति इतनी खराब है कि कई बार पशुपालक अस्पताल आने से ही कतराते हैं। गांव में बड़े पैमाने पर पशुधन होने के बावजूद अस्पताल की सुविधाएं न्यूनतम स्तर पर हैं, जो पशुपालकों के साथ सीधी लापरवाही जैसा महसूस होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्याओं को लेकर विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, डॉक्टरों की नियमित तैनाती हो और साफ-सफाई व्यवस्था में तुरंत सुधार किया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर अस्पताल की स्थिति इसी तरह बनी रही तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि पशुधन गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि अस्पताल की हालत नहीं सुधरी तो पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अब देखना यह है कि विभाग कब जागता है और ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक होता है।

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