Ghaziabad GDA Zone-4 में सैकड़ों स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल : फायर ब्रिगेड तक पहुंचने का रास्ता नहीं
गाजियाबाद। जीडीए के जोन-4 क्षेत्र में संचालित किए जा रहे सैकड़ों स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कई स्कूल ऐसे स्थानों पर संचालित हो रहे हैं, जहां आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी के पहुंचने तक के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद ये स्कूल वर्षों से लगातार संचालित किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी स्कूल में आग लगने, गैस रिसाव, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य आपात स्थिति में तत्काल फायर ब्रिगेड की जरूरत पड़ जाए तो दमकल की गाड़ी मौके तक पहुंचेगी कैसे? इसी तरह किसी बच्चे या कर्मचारी की गंभीर तबीयत बिगड़ने अथवा दुर्घटना होने की स्थिति में एंबुलेंस के स्कूल तक पहुंचने में भी रास्ते की समस्या गंभीर बाधा बन सकती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि इन स्कूलों की स्थिति लंबे समय से ऐसी ही है, तो संबंधित विभाग ने अब तक इनकी जांच क्यों नहीं की? क्या इन स्कूलों को संचालन की अनुमति देने से पहले मौके पर पहुंचकर आपातकालीन पहुंच मार्ग, अग्नि सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों का सत्यापन किया गया था?
नोटिस और कार्रवाई पर भी सवाल
जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि कई स्कूल वर्षों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन जीडीए की ओर से इन पर कार्रवाई या नोटिस की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित विभाग ने इन स्कूलों का कभी स्थलीय निरीक्षण किया? यदि किया तो आपातकालीन रास्ते की कमी क्यों नजरअंदाज की गई? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ, तो इतने वर्षों से स्कूलों का संचालन कैसे होता रहा?
यह मामला केवल भवन या नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। स्कूलों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मासूम बच्चे मौजूद रहते हैं। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि दमकल या एंबुलेंस घटनास्थल तक ही समय पर नहीं पहुंच पाती, तो छोटी घटना भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
सबसे गंभीर प्रश्न यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई करेगा? यदि किसी स्कूल तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने का रास्ता ही नहीं है, तो वहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में बच्चों को भेजते समय वे यह उम्मीद करते हैं कि आपात स्थिति में प्रशासन और बचाव दल तत्काल मदद पहुंचा सकेंगे। लेकिन यदि स्कूलों की भौतिक स्थिति ही ऐसी है कि बचाव वाहन समय पर पहुंच नहीं सकते, तो यह अभिभावकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
जीडीए से उठते हैं ये सवाल
- जोन-4 में ऐसे कितने स्कूल हैं जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी के पहुंचने का पर्याप्त रास्ता नहीं है?
- क्या जीडीए ने इन स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण कराया है?
- निरीक्षण हुआ तो कितने स्कूलों को नोटिस जारी किए गए?
- कितने स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई?
- क्या स्कूलों के भवन और आसपास के रास्तों का आपातकालीन सुरक्षा मानकों के अनुसार सत्यापन किया गया?
- क्या संबंधित विभाग ने अग्निशमन विभाग से भी इन स्कूलों की सुरक्षा स्थिति पर रिपोर्ट ली है?
- यदि नियमों में कमी है तो वर्षों से संचालन की अनुमति किस आधार पर बनी रही?
मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। सवाल किसी एक स्कूल का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा का है जो प्रतिदिन इन परिसरों में पढ़ने पहुंचते हैं। प्रशासन को किसी संभावित हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल ऐसे स्कूलों का सर्वे कराकर आपातकालीन पहुंच मार्ग, अग्नि सुरक्षा और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच करनी चाहिए।
क्योंकि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि हादसे से पहले व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।