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Ghaziabad News : गाजियाबाद की महिला पुलिस पर कोर्ट का सख्त रुख : फर्जी एनकाउंटर के आरोप में थानेदार पर दर्ज होगा प्रकीर्ण वाद

गाजियाबाद | 08-Nov-2025 06:26 AM | 11 |
गाजियाबाद
फर्जी एनकाउंटर के आरोप में थानेदार पर दर्ज होगा प्रकीर्ण वाद

गाजियाबाद। जनपद में तैनात महिला पुलिस पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मामला 26/27 अक्तूबर की रात हुए उस कथित एनकाउंटर का है, जिसमें महिला पुलिस टीम ने चार युवकों — इरफान, शादाब, अमन और नाजिम — को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि ये चारों ऑटो में बैठाकर यात्रियों से लूटपाट करते थे और एनकाउंटर के दौरान पकड़े गए। लेकिन अब कोर्ट ने इस पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और महिला थानेदार के खिलाफ प्रकीर्ण वाद (Miscellaneous Case) दर्ज करने का आदेश दिया है।

कोर्ट में पेश किए जाने के बाद चारों युवकों ने खुलासा किया कि उन्हें किसी एनकाउंटर में नहीं, बल्कि थाने से सीधा जंगल में ले जाकर गोली मारी गई। आरोप है कि पुलिस ने मामले को “एनकाउंटर” दिखाकर अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश की। युवकों की चोटों को देखकर अदालत ने इस पर संदेह जताया और मामले की गहराई से जांच के निर्देश दिए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान महिला थानेदार से थाने की CCTV फुटेज पेश करने को कहा, जिससे यह साबित हो सके कि गिरफ्तारी कैसे और कहां हुई। लेकिन थानेदार ने बार-बार बहाने बनाते हुए फुटेज प्रस्तुत नहीं की। इस रवैये से नाराज कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस अपनी कार्रवाई को लेकर पारदर्शी नहीं है और इससे संदेह और गहरा होता जा रहा है।

कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को भी निर्देश दिया है कि एक मेडिकल बोर्ड गठित कर चारों युवकों की डॉक्टरी जांच कराई जाए और उनके शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों की गिनती की जाए। रिपोर्ट आने के बाद अदालत अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय करेगी।

यह पूरा मामला उस समय का है जब प्रदेश सरकार नवरात्रि के दौरान "मिशन शक्ति" अभियान चला रही थी — जिसमें महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। इसी दौरान महिला पुलिस टीम द्वारा किया गया यह एनकाउंटर उस समय “साहसिक कार्रवाई” के रूप में प्रचारित हुआ था। लेकिन अब सामने आए तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद जिला पुलिस प्रशासन में हलचल मच गई है। वरिष्ठ अधिकारी मामले की समीक्षा कर रहे हैं और कहा जा रहा है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने को मजबूर करता है कि क्या “एनकाउंटर संस्कृति” के नाम पर पुलिस को कानून से ऊपर मान लिया गया है, या फिर न्याय व्यवस्था अब भी पीड़ितों की आवाज सुनने में सक्षम है।

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