गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक : सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, नगर निगम ने कसी कमर
गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक अब एक गंभीर जनस्वास्थ्य और सुरक्षा समस्या बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से जुलाई 2025 के बीच शहरी क्षेत्र में 3 लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इसका मतलब है कि हर तीन मिनट में एक व्यक्ति कुत्ते के काटने का शिकार हो रहा है। ग्रामीण इलाकों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा और भी भयावह हो जाता है।
इस चिंताजनक स्थिति के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में अहम फैसला सुनाया है। गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कुत्तों के काटने के मामले गंभीर चिंता का विषय हैं और तत्काल ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि आदेश मिलते ही उसे लागू किया जाएगा, लेकिन इसके लिए संसाधन जुटाना बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल नगर निगम दो एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर चला रहा है, जहां प्रतिदिन करीब 50 कुत्तों का स्टरलाइजेशन होता है। इसके बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है जहां से पकड़ा गया था।
हालांकि, शहर में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या लाखों में है और मौजूदा क्षमता बेहद नाकाफी है। हर महीने करीब 1,500 कुत्तों का बधियाकरण किया जा रहा है, लेकिन इससे हमलों पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है।
पार्कों, कॉलोनियों और सोसाइटीज में लोग डर के साए में जी रहे हैं, खासकर बच्चे और बुजुर्ग। डॉ. कुमार ने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जागरूक नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक उम्मीद है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए इच्छाशक्ति, पर्याप्त बजट और ठोस रणनीति जरूरी है।
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