₹147 करोड़ की RDSS निविदा में फर्जीवाड़े का आरोप : A.K. Construction पर कूटचित दस्तावेज का इस्तेमाल करने की शिकायत, CM से FIR और जांच की मांग
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की RDSS योजना के तहत लगभग ₹147.05 करोड़ की निविदा में गंभीर दस्तावेजी धांधली का मामला सामने आया है। रायपुर स्थित 'M/s A.K. Construction' पर निविदा की पात्रता हासिल करने के लिए फर्जी व कूटचित (Forged) अनुभव प्रमाण-पत्र का उपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के अध्यक्ष अजय चकोले ने सूचना का अधिकार (RTI) से प्राप्त प्रमाणित शासकीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है।
RTI दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा
स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के अध्यक्ष अजय चकोले के अनुसार, यह मामला RDSS निविदा क्रमांक 02-08/CSPDCL/RDSS/TS-5547 (दिनांक 13.03.2023, पैकेज-कांकेर) से जुड़ा है। इस निविदा में M/s K.R.C. Construction (P) Ltd. और M/s A.K. Construction ने जॉइंट वेंचर (JV) के रूप में भाग लिया था।
RTI से प्राप्त शासकीय अभिलेखों के अनुसार:
अनुभव प्रमाण-पत्र क्रमांक
CSPDCL-11-09/Works/DDUGJY/373(दिनांक 25.08.2022) मूल रूप से 'Srishti Construction' के नाम से जारी किया गया था।आरोप है कि M/s A.K. Construction ने इसी प्रमाण-पत्र में हेरफेर कर इसे अपने नाम से निविदा पात्रता के समर्थन में जमा कर दिया।
निविदा प्रक्रिया और विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि मूल प्रमाण-पत्र किसी दूसरी संस्था के नाम पर था, तो निविदा स्क्रूटनी के दौरान अधिकारियों ने इसे किस आधार पर स्वीकार किया?
सत्यापन पर संशय: क्या मूल प्रमाण-पत्र जारी करने वाले विभाग से इसकी सत्यता की जांच कराई गई थी? यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट क्या थी?
अधिकारियों की संलिप्तता: बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा अंतर नजरअंदाज होना असंभव है। इसलिए सत्यापन करने वाली समिति और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।
जॉइंट वेंचर की वैधानिकता: A.K. Construction की पात्रता संदिग्ध होने के कारण पूरे Joint Venture और आवंटित कार्यादेश (Work Order) की वैधानिक स्थिति रद्द करने योग्य है।
मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें
उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच: RTI से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों का मूल निविदा फाइलों से मिलान कर किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराई जाए।
FIR और आपराधिक कार्रवाई: कूटरचना और धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर M/s A.K. Construction और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।
वित्तीय हितों की सुरक्षा: शासन को नुकसान से बचाने के लिए संबंधित निविदा व कार्यादेश की समीक्षा कर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
"हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि RTI से प्राप्त प्रमाणित सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच सामने लाना है।"
— अजय चकोले (अध्यक्ष, स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति)
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उनके पास RTI से प्राप्त सभी प्रमाणित दस्तावेज सुरक्षित हैं, जिन्हें वे मुख्यमंत्री कार्यालय या जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए तैयार हैं।