2 साल तक अटकाए रखी बुजुर्ग की रजिस्ट्री : उपभोक्ता आयोग ने RDA पर ठोका जुर्माना, ब्याज समेत हर्जाना भरने का हुक्म
रायपुर (छत्तीसगढ़)। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की बड़ी लापरवाही पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने कड़ा प्रहार किया है। आबंटित दुकान का पूरा भुगतान हासिल करने के बाद भी करीब 2 साल तक रजिस्ट्री न करने के मामले में आयोग ने RDA को 'सेवा में गंभीर कमी' (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए RDA को पीड़ित बुजुर्ग उपभोक्ता को ब्याज सहित मानसिक क्षतिपूर्ति और कानूनी खर्च की राशि अदा करने का आदेश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
टेंडर से आबंटन: 84 वर्षीय बुजुर्ग उपभोक्ता गोपीचंद चकोले ('भारत यूटिलिटी') ने RDA की 'आदर्श बाजार योजना' के तहत निविदा प्रक्रिया से दुकान क्रमांक BR-03 (क्षेत्रफल 20 वर्गफीट) ₹5,00,100 में खरीदी थी।
समय पर पूरा भुगतान: परिवादी ने RDA की शर्तों का पालन करते हुए 4 मई 2022 तक पूरी राशि जमा कर दी थी।
शर्तों का उल्लंघन: नियमानुसार पूरी राशि जमा होने के 1 महीने के भीतर (4 जून 2022 तक) दुकान का विक्रय विलेख (Registry) पंजीकृत किया जाना अनिवार्य था।
24 महीने का विलंब: उपभोक्ता के बार-बार चक्कर काटने के बावजूद RDA ने लगभग दो साल की देरी के बाद 10 अक्टूबर 2024 को रजिस्ट्री निष्पादित की।
बुजुर्ग को नुकसान: रजिस्ट्री में हुई इस देरी के कारण बुजुर्ग उपभोक्ता समय पर अपना रोजगार शुरू नहीं कर सके, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और आर्थिक क्षति झेलनी पड़ी।
उपभोक्ता आयोग का कड़ा फैसला
मामले की सुनवाई अध्यक्ष श्री डाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य श्रीमती निरूपमा प्रधान एवं सदस्य श्री अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने की। आयोग का नोटिस तामील होने के बावजूद RDA की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ और न ही कोई जवाब पेश किया गया।
साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए RDA को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
6% वार्षिक ब्याज: जमा राशि ₹5,00,100 पर 4 जून 2022 से 10 अक्टूबर 2024 तक की अवधि का 6% वार्षिक साधारण ब्याज दिया जाए।
मानसिक क्षतिपूर्ति: पीड़ित बुजुर्ग को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में ₹10,000 का मुआवजा दिया जाए।
वाद व्यय: परिवादी को कानूनी खर्च और अधिवक्ता शुल्क के रूप में ₹5,000 का भुगतान किया जाए।
45 दिनों की समय-सीमा: आयोग ने RDA को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि तय समय सीमा में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश तिथि से अदायगी तक 6% वार्षिक दर से अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा।