कजरी तीज मेले में श्रद्धालुओं की भीड़, राम नगर रोड पर दिखा आस्था का जनसैलाब : गोण्डा स्थित दुखहरण नाथ मंदिर की ओर उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा माहौल
बाराबंकी तहसील फतेहपुर भाद्रपद माह में पड़ने वाला कजरी तीज पर्व क्षेत्र की आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि इसमें स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की गहरी झलक देखने को मिलती है। इसी क्रम में सोमवार को तहसील फतेहपुर की राम नगर रोड पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर करीब 1 बजे से ही सैकड़ों श्रद्धालु पैदल, मोटरसाइकिलों और अन्य साधनों से गोण्डा जनपद स्थित प्रसिद्ध दुखहरण नाथ मंदिर की ओर जाते दिखाई दिए।
श्रद्धालुओं का यह जत्था भक्ति और उत्साह से ओतप्रोत नजर आया। मंदिर की ओर बढ़ते हुए महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग हाथों में कलश, ध्वज लिए भजन-कीर्तन गाते देखे गए। पूरा मार्ग भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर रहे थे तो कई मोटरसाइकिल और जीप से परिवार सहित इस यात्रा में शामिल हुए। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए पानी और प्रसाद की व्यवस्था की, जिससे श्रद्धा और सहयोग का सुंदर नजारा देखने को मिला।
स्थानीय निवासियों लवकुश, हरिवंश और दिलीप ने बताया कि कजरी तीज का यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि दुखहरण नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस अवसर पर विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
राम नगर रोड पर यात्रा का दृश्य बेहद मनमोहक था। श्रद्धालु डमरू, झाल और भजन-कीर्तन के साथ आगे बढ़ते रहे। महिलाएं मंगलगीत गाती दिखीं तो बच्चे उत्साहपूर्वक माता-पिता के साथ डगर पर चलते नजर आए। इस दौरान भक्तिमय माहौल ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक रंग में रंग दिया। कई श्रद्धालु दूर-दराज के जिलों से भी पहुंचे थे, जिससे क्षेत्र में रौनक और बढ़ गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कजरी तीज का यह मेला न केवल आस्था का पर्व है बल्कि इसमें ग्रामीण जीवन और संस्कृति की जीवंत झलक भी दिखाई देती है। मेले में हर वर्ष विभिन्न प्रकार की दुकानें सजती हैं, जिनमें पकवानों, मिठाइयों, खिलौनों और घरेलू सामानों की रौनक रहती है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस मेले का भरपूर आनंद उठाते हैं।
धार्मिक मान्यता और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा यह पर्व सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। हर वर्ग और हर समुदाय के लोग इस अवसर पर एक साथ आकर भक्ति में डूब जाते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ देखकर यह साफ झलकता है कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी आस्था और परंपरा लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।
कल लगने वाले मुख्य मेले में और भी अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि दूर-दराज जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दुखहरण नाथ मंदिर पहुंचेंगे और भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करेंगे। कजरी तीज का यह आयोजन निस्संदेह आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।
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