गोरखपुर में डेयरी कॉन्क्लेव-2026: पशुपालन को बढ़ावा, 28 लाभार्थियों को मिले अनुमति पत्र : विकास भवन में आयोजित कॉन्क्लेव में किसानों को आधुनिक डेयरी तकनीकों और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी, 28 पात्र लाभार्थियों का हुआ चयन।
विभव पाठक, ब्यूरो चीफ
गोरखपुर। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को स्वरोजगार के मजबूत माध्यम के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से बुधवार को विकास भवन सभागार में डेयरी कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और विभागीय अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने किया। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को डेयरी एवं पशुपालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाएं और अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धतियों से पशुपालन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
कॉन्क्लेव में श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, मदर डेयरी, पराग डेयरी और ज्ञान डेयरी सहित विभिन्न डेयरी संस्थानों ने अपने स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर दुग्ध उत्पादों के प्रदर्शन के साथ आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशु पोषण और तकनीकी नवाचारों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना तथा नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत 28 पात्र लाभार्थियों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया गया। चयनित लाभार्थियों को अनुमति पत्र प्रदान किए गए, जिससे पशुपालकों में उत्साह देखने को मिला।
उपनिदेशक पशुपालन डॉ. वेद प्रकाश एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पाण्डेय ने विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. बी.के. सिंह, डॉ. सुबोध तथा कृषि विज्ञान अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह ने पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण, संतुलित आहार, चारा प्रबंधन और आधुनिक डेयरी तकनीकों पर किसानों को जागरूक किया।
अधिकारियों ने बताया कि दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी 75 जिलों में डेयरी कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सके।