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        <!-- <title><![CDATA[ दिल्ली न्यूज़ | Your News Feed ]]></title> -->
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        <description><![CDATA[ Latest news in the दिल्ली न्यूज़ category ]]></description>
        <language>en</language>
        <lastBuildDate>Thu, 05 Nov 2026 23:15:31 +0530</lastBuildDate>
        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 23:15:31 +0530</pubDate>
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            <title>दिल्ली न्यूज़</title>
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                <title><![CDATA[ क्या अब कोई भी काला धन नहीं छिपा पाएगा? ]]></title>
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                <description><![CDATA[ 78 वर्षीय पूर्व बैंकर जे. पी. गुप्ता ने दुनिया को दिया भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का दावाभारत ही नहीं, पूरे विश्व में भ्रष्टाचार, काले धन और टैक्स चोरी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन इसी बीच 78 वर्षीय पूर्व बैंकर, आविष्कारक और लेखक जे. पी. गुप्ता ने दावा किया है कि उन्होंने दुनिया की पहली ऐसी तकनीक विकसित की है जो किसी भी देश को 99.99% तक भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी और काले धन से मुक्त कर सकती है।क्या है ‘HONEST WITH CIN?’ टेक्नोलॉजी?जे. पी. गुप्ता के अनुसार यह टेक्नोलॉजी हर देश के नागरिक को एक यूनिक CIN (Citizen Identification Number) के माध्यम से इतनी पारदर्शिता प्रदान करती है कि कोई भी व्यक्ति—एक रुपये का भी काला धन नहीं छिपा पाएगाटैक्स चोरी नहीं कर पाएगाकिसी भी आर्थिक अपराध में शामिल नहीं हो सकेगायह टेक्नोलॉजी लागू होने पर:✔ पूरा काला धन एक साल के भीतर सरकार की बुक्स में लौट आएगा✔ टैक्स दरें एक-तिहाई तक कम की जा सकेंगी✔ वित्तीय घोटालों और बैंकिंग धोखाधड़ी पर तुरंत रोक लगेगी✔ 24 घंटे से 15 दिनों के भीतर आर्थिक मामलों में न्याय मिल सकेगा✔ नकद लेनदेन में काले धन का एक पैसा भी छिप नहीं सकेगा✔ हर नागरिक 100% ईमानदार वित्तीय व्यवहार करने को मजबूर हो जाएगागुप्ता का कहना है कि यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई प्रणाली का परिणाम होगा।दूसरी टेक्नोलॉजी—SUPER BANK STATEMENT (SBS)यह टेक्नोलॉजी HONEST WITH CIN का हृदय (Heart) है।आधुनिक लेखांकन को सिर्फ एक लाइन में पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज कर सकती हैकोई भी व्यक्ति, जिसे डेबिट–क्रेडिट समझ नहीं, वह भी बही-खाता आसानी से बना सकेगायह मौजूदा सभी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर को अप्रासंगिक कर देगीगुप्ता का दावा है कि SBS के बिना “Honest With CIN” संभव नहीं। दोनों मिलकर एक वैश्विक स्तर की आर्थिक क्रांति ला सकते हैं।क्या अब कोई भी काला धन छिपा पाएगा?इन दोनों तकनीकों के आने के बाद:सभी भ्रष्ट राजस्व अधिकारी, टैक्स चोर और आर्थिक अपराधी स्वतः ही सिस्टम में पकड़ में आएंगेदेश में 100% पारदर्शिता और ईमानदार आर्थिक व्यवस्था लागू होगीचुनाव प्रणाली भी पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगीपुलिस और जांच एजेंसियों का काम कई गुना आसान हो जाएगाजे. पी. गुप्ता ने जनता से मांगा समर्थन78 वर्षीय नवाचारक जे. पी. गुप्ता ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ गरीबों, वंचितों और आम लोगों कोएक सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन दिलाना है।उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस परिवर्तनकारी तकनीक को अपनाने के लिए अपनी सरकार को प्रेरित करें। ]]></description>
                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 04:28:24 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ स्त्री वर्ष: समकालीन भारतीय साहित्य में नारी सृजन का उजास ]]></title>
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                <description><![CDATA[ विशेष रिपोर्ट: रविंद्र आर्यनई दिल्ली।भारतीय साहित्य का संसार निरंतर परिवर्तनशील है, जो समाज के उभरते स्वर, प्रश्न और संघर्षों को अपने भीतर समेटता चलता है। इसी निरंतरता को विस्तार देने और भारतीय स्त्री की सृजनात्मक उपस्थिति को रेखांकित करने के उद्देश्य से हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा “स्त्री वर्ष — भेंट, पाठ, चर्चा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि स्त्री अनुभव की विविध परतों, सवालों और प्रतिरोध की दास्तान का सार्वजनिक उत्सव भी था।बहुआयामी रचनाएँ, बहुस्वरिता की चमककार्यक्रम में प्रस्तुत रचनाओं ने इस बात को प्रमाणित किया कि आज की भारतीय स्त्री, साहित्य में केवल भावनाओं की वाहक नहीं, बल्कि विचारों की निर्माता भी है।गीतांजलि श्री की प्रस्तुति ‘सह-सा’ में मानवीय रिश्तों की सूक्ष्म जटिलताओं की खोज दिखाई दी।अलकनंदा सरावगी ने ‘कलकत्ता कँपकँपौलिटन’ के माध्यम से महानगरीय जीवन की घुटन और संवेदना को नए मुहावरों में व्यक्त किया।अनामिका की ‘दूर देश के परिन्दे’ स्मृति, पहचान और प्रवासन के मनोविज्ञान को खोलती है, तो प्रत्यक्षा ने ‘शीशाघर’ के माध्यम से स्त्री आत्मा की आंतरिक उलझनों और संघर्षों को सामने रखा।वन्दना राग की ‘सरकफंदा’ सामाजिक संरचनाओं की निर्माण-प्रक्रिया और नियंत्रण तंत्र पर तीखी टिप्पणी करती है।असना अज़दानी की ‘इस शहर में एक शहर था’ ने महानगर के भीतर छिपे समाज की परतें हटाने की कोशिश की।सुजाता की ‘दरियागंज बाज़ार फते ख़ाँ’ बाजार और स्मृति के रिश्ते पर रोचक कथा कहती है।सविता भागवत की ‘जहाँ पाँच पाँव वाला’ और शोभा लिप्सा की ‘शुकमाया हाडमा’ नए सांस्कृतिक संदर्भों और आदिवासी जीवन की विडंबनाओं को मंच पर लाईं।इन सभी रचनाओं की प्रस्तुति ने यह स्थापित किया कि स्त्री अनुभव जितना व्यापक है, उतना ही उसकी अभिव्यक्ति का सौंदर्य और प्रतिरोध भी।विचार और अनुभव का साझा मंचकार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका मृदुला गर्ग ने की, जिनकी उपस्थिति स्वयं एक परंपरा और असहमति की प्रतीक मानी जाती है।इसके अलावा मंच पर प्रेरणा, मधु, अर्चना, नैना, सुधा, शांति, सुचित्रा और सविता जैसी प्रमुख लेखिकाएँ उपस्थित रहीं।चर्चा में भाषा की राजनीति, मीडिया की भूमिका, स्त्री पात्रों का विकास, रचनात्मक स्वतंत्रता और बदलते सामाजिक ढाँचों पर गंभीर विमर्श हुआ।वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज की स्त्री कथानक की मात्र पात्र नहीं, बल्कि उसकी निर्माता है—जो कहानी को अपने दृष्टिकोण से लिखती और दिशा देती है।दिल्ली की सांस्कृतिक धड़कनकार्यक्रम 03 दिसंबर 2025, बुधवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, कमला देवी कॉम्प्लेक्स, मटिल्डापेप्स हॉल में आयोजित हुआ।शाम 4:30 बजे चाय सत्र से शुरुआत और रात 8:30 बजे समापन तक यह परिसर साहित्यिक संवाद का केंद्र बना रहा।कार्यक्रम को हिंदी अकादमी दिल्ली एवं भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का सहयोग प्राप्त था।दिल्ली के साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इसे एक जीवंत और संवेदी आयोजन में परिवर्तित कर दिया।साहित्य में स्त्री — एक जीवंत घोषणा“स्त्री वर्ष” कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि साहित्य में स्त्री का योगदान किसी सीमित परिभाषा में नहीं बँध सकता।वह कवयित्री, कथाकार, चिंतक और समाज की द्रष्टा—सभी रूपों में उपस्थित है।यह आयोजन न केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि स्त्री स्वरों की बौद्धिक स्वतंत्रता और वैचारिक विविधता का उत्सव भी—जो भविष्य के साहित्य को दिशा देने का वादा करता है।— विशेष रिपोर्ट, रविंद्र आर्य ]]></description>
                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 23:09:32 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ देश में 26 BLO की मौत से हड़कंप, सुरक्षा सवालों पर उठी गंभीर बहस ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली। देशभर में 26 BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौत की खबर ने चुनावी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मैदान में ड्यूटी निभा रहे BLOs के सिर पर मानो मौत का साया मंडरा रहा है। इन मौतों को लेकर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है, जहां विपक्ष सरकार पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगा रहा है।कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और चुनाव आयोग दोनों की जिम्मेदारी है।AICC सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेट ने कहा कि देश में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि “DEADLY SIR” जैसा माहौल बन गया है, जहां BLOs जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।सुप्रिया श्रीनेट ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर 26 परिवार अपने प्रियजनों को खोकर दुख में डूबे हुए हैं, वहीं BJP के नेता गैर-जरूरी मुद्दों को उछालकर देश का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर इतने BLOs की मौत किन परिस्थितियों में हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव ड्यूटी कोई युद्ध नहीं है कि कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़े। सुप्रिया श्रीनेट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से तुरंत स्थिति स्पष्ट करने, जिम्मेदारी तय करने और BLOs की सुरक्षा मजबूत बनाने की मांग की है। ]]></description>
                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 06:48:48 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ दिल्ली में हवा ज़हरीली, कदम नाकाफी ]]></title>
                <link>https://phmnews.com/delhi-news/delhi-sarkar-pradushan-niyantran-mein-fail-grap-stage-3-laghu</link>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली में हवा लगातार ज़हरीली होती जा रही है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंध और आदेश प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। GRAP स्टेज-III लागू होने के बाद सरकारी और निजी कार्यालयों में 50% स्टाफ सीमा, वर्क फ्रॉम होम, स्टैगर्ड टाइमिंग्स जैसे निर्देश जारी किए गए, पर विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम “कागज़ी” साबित हो रहे हैं और ज़मीनी स्तर पर इनका असर नगण्य है।प्रदूषण का स्तर बीते कई हफ्तों से गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर लगातार खतरनाक स्तर पार कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद न तो निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक दिख रही है, न सड़कों पर धूल नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था नज़र आती है। निजी वाहनों की संख्या पर भी कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। दिल्ली की जनता का कहना है कि सरकार हर साल वही पुराने आदेश जारी करके अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेती है, लेकिन असली काम नहीं होता।पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण के असली स्रोत — जैसे वाहन धुआं, सड़क धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, NCR में पराली जलाना और निर्माण गतिविधियां — पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिखती। 50% स्टाफ कैप जैसे कदम सिर्फ अस्थायी राहत देते हैं, जबकि समस्या की जड़ें कहीं गहरी हैं।कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भी यह सवाल उठाया है कि “क्या सिर्फ दफ्तर बंद करने से दिल्ली की हवा साफ़ हो जाएगी?”, जबकि ट्रकों की आवाजाही, थर्मल प्लांटों का उत्सर्जन और बड़े उद्योगों पर कोई कड़े कदम नज़र नहीं आते।दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच भी जिम्मेदारी को लेकर टकराव देखने को मिलता है। दोनों एक-दूसरे पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाते हैं, लेकिन राजधानी का आम नागरिक हर साल ज़हरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होता है। लोगों का कहना है कि सरकारें सिर्फ मीटिंग करती हैं, आदेश जारी करती हैं, लेकिन जमीन पर न तो मॉनिटरिंग होती है और न ही कड़ाई।विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि अगर प्रदूषण नियंत्रण में गंभीरता होती, तो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाता, औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त निगरानी होती, और NCR में पराली प्रबंधन के लिए प्रभावी योजना लागू की जाती।लेकिन मौजूदा हालात में यह साफ़ है कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर जो भी कार्रवाई हो रही है, वह नाकाफी है।जनता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “सरकार मुकाबले में नहीं, सिर्फ दिखावे में लगी है।”दिल्ली की हवा साँसों पर लगातार हमला करती जा रही है, और लोगों का विश्वास है—अगर सरकारें इसी तरह ढुलमुल रवैया अपनाती रहीं, तो हालात और बदतर होंगे। ]]></description>
                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 23:22:59 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ Delhi News: अल-फलह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर-17 ]]></title>
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                <description><![CDATA[ विशेष रिपोर्टरिपोर्टर: रविंद्र आर्य | फरीदाबाद – दिल्लीफरीदाबाद की प्रसिद्ध अल-फलह यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। विश्वविद्यालय की बिल्डिंग नंबर–17 से देश को अस्थिर करने वाले मजहबी षड्यंत्रों की मीटिंग होने का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी कमरे में बैठकर दिल्ली, अयोध्या और लखनऊ जैसे सांस्कृतिक-धार्मिक शहरों को निशाना बनाने की प्लानिंग बनाई जाती थी।सूत्रों का कहना है कि यह पूरी संरचना ISI हेडक्वार्टर की तरह ऑपरेट होने वाला एक खास ईकोसिस्टम था—जहां पढ़ाई के नाम पर संवेदनशील युवाओं की पहचान, ब्रेनवॉश और भर्ती का काम वर्षों से चल रहा था।25 साल से फरार हमूद सिद्दीकी गिरफ्तार: चिटफंड घोटाले से जिहादी नेटवर्क तकइस पूरे नेटवर्क का बड़ा नाम हमूद सिद्दीकी, आखिरकार हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।हमूद, अल-फलह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद का सगा भाई है और पिछले 25 साल से फरार था। चिटफंड स्कीम के नाम पर करोड़ों की ठगी के बाद वह देश से गायब हो गया था, लेकिन जांच में सामने आया कि उसके ठगी के पैसे का इस्तेमाल कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों और नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा था।“पढ़ाई नहीं, प्लानिंग”— आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका था परिसरजांच अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी के कई विभागों में भर्ती और ब्रेनवॉश का एक सुनियोजित मॉडल तैयार किया गया था। कुछ तथाकथित समाजसेवी और बुद्धिजीवी लगातार यह नैरेटिव चलाते रहे कि“इन लोगों को पढ़ाओ-लिखाओ, तभी सुधरेंगे।”लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलटी निकली—पढ़-लिखकर वही लोग तकनीकी तौर पर और खतरनाक बन रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं पढ़े-लिखे युवाओं में से कुछ डॉक्टर, लैब टेक्निशियन और शोधार्थी लोगों की जान बचाने के बजाय #राइसिन जैसे घातक जैविक ज़हर तैयार करने की कोशिश कर रहे थे—जो कुछ ही मिलीग्राम में लाखों लोगों की हत्या कर सकता है।“एक हाथ में कुरान, एक हाथ में कंप्यूटर”— तकनीक का दुरुपयोगडॉ. परविंदर सिंह विश्व शांति राजदूत, संयुक्त राष्ट्र एवं अध्यक्ष, विश्व बौद्ध महासंघ बताते है की कट्टरपंथी प्रचारक अकसर यह भ्रम फैलाते रहे कि “तकनीकी ज्ञान और मजहबी शिक्षा साथ होगी तो समाज का उत्थान होगा”, लेकिन बम, कोडिंग और एन्क्रिप्टेड संचार में माहिर यह नेटवर्क साबित करता है कि—तकनीक + कट्टरता = समाज के लिए सबसे बड़ा खतराफैज-ए-इलाही मस्जिद कनेक्शन: जिहादी उमर के पीछे दिखा संदिग्ध व्यक्ति गिरफ्तारदिल्ली पुलिस ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास आतंकी उमर के पीछे घूम रहे एक संदिग्ध को पकड़ा।उसके पास से 9एमएम MM के कारतूस बरामद हुए हैं, और हथियार की तलाश अभी भी जारी है।यह गिरफ्तारी अल-फलह यूनिवर्सिटी नेटवर्क से कितनी जुड़ी है, इसकी जांच एजेंसियाँ अब लिंक-जोड़ने में लगी हैं।“अल-फलाह” नाम क्यों चुना गया? आतंकियों का पैटर्न एक जैसा“अल-फलाह” शब्द अरबी में सफलता, उन्नति और मुक्ति के अर्थ में आता है।सकारात्मक धार्मिक अर्थ होने के कारण कट्टरपंथी संगठन इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं ताकि—* संस्थान पर पवित्रता का आवरण चढ़ जाए* आम लोगों को भ्रमित किया जा सके* गतिविधियाँ बिना शक के चलती रहेंयह पैटर्न जिहादी संगठनों में नया नहीं है। “अंसार”, “खैर”, “इस्लाह”, “फलाह”, “हिकमत” जैसे शब्दों का उपयोग कर वे धार्मिक वैधता का मुखौटा लगा देते हैं।अल-फलह यूनिवर्सिटी में बिल्डिंग नंबर 17 कोई साधारण मीटिंग हॉल नहीं था—यह फरीदाबाद में छिपे एक पूरे ISI-शैली के नेटवर्क का दिमाग था।हमूद सिद्दीकी की गिरफ्तारी, राइसिन षड्यंत्र, कारतूस बरामदगी, मस्जिद लिंक और धार्मिक शब्दों के दुरुपयोग ने यह साबित कर दिया है कि—भारत के खिलाफ कट्टरमूलवादी नेटवर्क शिक्षा संस्थानों के भीतर से भी ऑपरेट कर रहे हैं, और इनका लक्ष्य सिर्फ एक—हिंदू समाज और राष्ट्र को कमजोर करना।सूर्य सागर महाराज की विचारधारा मे कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरे को अब खुलकर समझना होगाइसी क्रम में एक और गंभीर मामला सामने आया है। गुजरात के जैन गुरू सूर्य सागर महाराज जी बताते हैं कि गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में स्थित एक दरगाह से भारी मात्रा में देशी हथियार बरामद किए गए हैं। हज़रत कच्छी पीर दरगाह के मुजावर से पुलिस ने विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट के बाद जारी हाई अलर्ट के चलते गिर सोमनाथ पुलिस ने मूल द्वारका बंदरगाह क्षेत्र में एक बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया। एसपी जयदीपसिंह जाडेजा के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में 2 DYSP, 6 PI, 7 PSI, SOG, LCB और बॉम्ब डिस्पोज़ल स्क्वॉड समेत 120 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे।तलाशी के दौरान SOG टीम को दरगाह परिसर से कुल्हाड़ी, काटो और तलवार जैसे देशी हथियार मिले। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिल्ली की घटना के बाद तटीय इलाकों में सुरक्षा और गश्त और अधिक कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रहेंगे, ताकि किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।सूर्य सागर महाराज का कहना है कि हाल की घटनाएँ समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। वे कहते हैं कि कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरे को अब खुलकर समझना और उसके प्रति सतर्क रहना आवश्यक हो गया है। उनका मानना है कि कई बार समाज चुप रह जाता है जिससे कट्टर तत्वों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए आवश्यक है कि लोग कानून के दायरे में रहते हुए, तथ्यात्मक जानकारी और प्रमाणों के माध्यम से समाज को जागरूक करें, ताकि किसी भी प्रकार के चरमपंथ, हिंसा या षड्यंत्र से राष्ट्र और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।महाराज यह भी कहते हैं कि महिलाओं सहित समाज के सभी वर्गों को सुरक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकजुटता से जुड़ी चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका जोर है कि कट्टरपंथ और हिंसात्मक मानसिकता के प्रति सजग रहना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।डॉ. परविंदर सिंह संदेह फ़रीदाबाद की अल-फलह यूनिवर्सिटी से जुड़े मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा यात्रा में ज़हर मिलाने की योजना थींराइसिन साजिश के खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए सूर्य सागर महाराज का कहना है कि यह घटना समाज को यह समझने पर मजबूर करती है कि कट्टरपंथी मानसिकता किस हद तक जाकर हिंसा की योजना बना सकती है। उनका कहना है कि ऐसे तत्व मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें किसी भी प्रकार का नैतिक या मानवीय मूल्य प्रभावित नहीं करता। महाराज का मत है कि इस प्रकार के ज़हरीले हमले कायरतापूर्ण तरीके हैं, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकते।बाबा बागेश्वर धाम की यात्रा में शामिल होने आए USA अमरीका के डॉ. परविंदर सिंह बताते हैं कि फ़रीदाबाद की एक यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा यात्रा में ज़हर मिलाने की योजना का संदेह जताया गया था। डॉ. सिंह का आरोप है कि यह साजिश यात्रा शुरू होने से पहले ही पुलिस की जानकारी में थी, पर खुलासा यात्रा फ़रीदाबाद से निकलने के बाद किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो सैकड़ों लोगों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।डॉ. सिंह और महाराज दोनों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन ओर आमजन को अधिक सतर्क और ज़िम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए, ताकि किसी भी विचारधारात्मक कट्टरपंथ या हिंसात्मक षड्यंत्र को समय रहते रोका जा सके।फ़रीदाबाद न्यूज़ के मुख्य संपादक धर्मेंद्र प्रताप का अल फलाह यूनिवर्सिटी का ख़ुलासाफ़रीदाबाद न्यूज़ के मुख्य संपादक धर्मेंद्र प्रताप का कहना है कि अल फलाह स्थानीय यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के फ़रार होने की जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात उभरकर आई है कि करीब 15 कश्मीरी डॉ. संदिग्ध लोग परिसर से लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में चल रही छापेमारी के दौरान लगभग 200 मुस्लिम डॉ. के भी नहीं मिलने की सूचना है।धर्मेंद्र प्रताप का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस आशंका की जाँच कर रही हैं कि इनमें से कुछ लोग भविष्य में कथित रूप से स्लीपर सेल या ओवरग्राउंड वर्कर की तरह, बाहरी असामाजिक नेटवर्क के लिए सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक एजेंसियों की ओर से अभी किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्कता बढ़ाकर तथ्यों की गहराई से जांच कर रही हैं।रविंद्र आर्य (विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं।) ]]></description>
                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 00:46:48 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ डॉ. परविंद्र सिंह के शब्दों में— सनातन-विरोधी गठबंधन की हार ]]></title>
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                <description><![CDATA[ लेखक : रविंद्र आर्य | विचार : डॉ. परविंद्र सिंह2025 के बिहार चुनाव ने भारत की राजनीति को सिर्फ नतीजों के आधार पर नहीं, विचारधारा और सांस्कृतिक चेतना के आधार पर नई दिशा दी है। 2020 में जो वामपंथी “विष-बेल” बिहार की धरती पर पनपना शुरू हुई थी— तुष्टीकरण, जातिवाद, धार्मिक विभाजन और कट्टरपंथी समूहों को पर्दे के पीछे बढ़ावा देने वाली— उसे बिहार ने पाँच साल में ही ज़ोरदार झटका देते हुए पूरी तरह दफन कर दिया।पेज3 न्यूज़ के संस्थापक डॉ. परविंद्र सिंह के अनुसार यह सिर्फ चुनावी हार नहीं, बल्कि “वामपंथी मानसिकता का सांस्कृतिक पराभव” है। वे मानते हैं कि बिहार की जनता ने न सिर्फ गठबंधन को हराया, बल्कि उस पूरे इको-सिस्टम को नकार दिया जिसने लगातार सनातन धर्म को अपमानित करने, हिंदू समाज को बांटने और राष्ट्रवाद को बदनाम करने का अभियान चला रखा था।ओवैसी, अखिलेश और हार ढकने का बहाना — सर, ईवीएम  की नौटंकीचुनाव परिणाम आने के बाद  के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि “विपक्ष को सोचना चाहिए कि वह बीजेपी को क्यों नहीं रोक पा रहे।”इधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी हार का कारण फिर वही पुराना— सर,ईवीएम , सिस्टम की गड़बड़ी — बताकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया।इसपर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. परविंद्र सिंह ने तीखा वार किया—“कब तक सर -ईवीएम की बकवास करते रहेंगे? हार जनता के मूड से होती है, मशीन से नहीं।”उन्होंने कहा कि हार गठबंधन की नीतियों, उनके तुष्टीकरण और सनातन-विरोधी एजेंडे की वजह से हुई है। जनता जाति-धर्म की दुकानदारी नहीं खरीदती; वह सुरक्षा, संस्कृति और राष्ट्रवाद चाहती है।गठबंधन की हार = सनातन-विरोध, वामपंथ और तुष्टीकरण की हारइस चुनाव में स्पष्ट दिखा कि—जो पार्टियाँ “विशेष समुदाय” को खुश करने और सनातन को गाली देने में लगी थीं— जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया।✓ सभी पार्टियों का वोट प्रतिशत देखें—✓ हर तरफ जनता ने एनडीऐ पर भरोसा दिखाया✓ कांग्रेस का “सूपड़ा साफ”✓ बिहार धीरे-धीरे कांग्रेस-मुक्त होता जा रहा हैडॉ. परविंद्र सिंह कहते हैं—“बिहार की जनता ने जातिवाद नहीं, ‘संस्कृति और सुरक्षा’ को प्राथमिकता दी— यही असली जनादेश है।”नेपाल ओर भारत में माओवाद खत्म — उसका असर बिहार की राजनीति पर* नेपाल ओर भारत में माओवादी विचारधारा का पतन हुआ, और उसका सीधा असर भारत-नेपाल सीमा पर भी दिखाई दिया।* सीमा पार से आने वाला वामपंथी नेटवर्क कमजोर* कट्टरपंथी समूहों की फंडिंग व लॉजिस्टिक्स बाधित* रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठ पर कड़ी रोक* सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत* बिहार के सीमावर्ती इलाकों में वर्षों तक सक्रिय “वामपंथी-इस्लामी गठजोड़” को इस चुनाव ने पूरी तरह ध्वस्त किया।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का प्रभाव — सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उत्थानबाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बिहार दौरा, प्रवचन और “हिंदू जागरण” का आह्वान चुनावी माहौल में सांस्कृतिक ऊर्जा लेकर आया।वे बार-बार कहते रहे—“अब हिंदू न डरेगा, न झुकेगा — सत्य और धर्म का समय आ गया है।”उनके प्रवचनों ने ग्रामीण बिहार व युवा वर्ग में स्पष्ट संदेश दिया कि यह केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सनातन पहचान का पुनरुत्थान है।डॉ. परविंद्र सिंह का अंतिम संवादडॉ. सिंह के अनुसार बिहार का 2025 जनादेश केवल NDA की जीत या विपक्ष की हार नहीं है—यह भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की निर्णायक विजय है।यह वामपंथी एजेंडे, तुष्टीकरण, कट्टरपंथ और झूठे नैरेटिव का अंतिम संस्कार है।वे कहते हैं—“2020 से 2025 तक, बिहार ने जो यात्रा तय की— वह विचारों की क्रांति है।जनता ने साफ-साफ कह दिया: भारत सनातन है, और सनातन ही भारत की आत्मा है।”“बिहार ने दिखा दिया — देश को तोड़ने वालों का अंत निश्चित है”लेखक : रविंद्र आर्य ]]></description>
                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 05:10:09 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ CJI जूता कांड के वकील डॉ. राकेश किशोर का सनातन चेतना अभियान ]]></title>
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                <description><![CDATA[ रिपोर्ट: रविंद्र आर्यनई दिल्ली।देश के सुप्रीम कोर्ट के चर्चित “CJI जूता कांड” के वकील और सनातन धर्म के प्रखर प्रवक्ता डॉ. राकेश किशोर (एडवोकेट, दिल्ली) ने एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के आयोजन की घोषणा करते हुए पूरे भारत के सनातनी समाज से आह्वान किया है कि वे 5 नवंबर 2025 (बुधवार), कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जवाई मंदिर में उपस्थित होकर भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा के समक्ष शांतिपूर्ण ध्यान (Meditation) और प्रार्थना करें।यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना, चेतना और आत्मजागरण का सामूहिक संकल्प है।“अब जागो और खजुराहो चलो” — धर्म की पुनर्स्थापना का आह्वानडॉ. किशोर ने अपने संदेश में कहा —“प्रिय सनातनी भाई-बहनो, अब जागो और चलो! यह समय धर्म की रक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का है। भगवान विष्णु की प्रतिमा की पुनः स्थापना के लिए हम सब एक साथ ध्यान और प्रार्थना करेंगे।”उनका कहना है कि यह आयोजन किसी दल या संस्था का नहीं, बल्कि “सनातन धर्म की आत्मा का उत्सव” है।खजुराहो में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष किया गया ध्यान भारत की सांस्कृतिक एकता और ईश्वरीय चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा।अपने पोस्टर में उन्होंने उद्धृत किया —“धर्मो रक्षति रक्षितः — धर्म की रक्षा करने वाला, स्वयं धर्म की रक्षा करता है।”मध्य प्रदेश से दिल्ली तक फैल रहा ‘खजुराहो चलो’ अभियानडॉ. किशोर ने बताया कि इस आयोजन के समन्वयन में मध्य प्रदेश की कई वरिष्ठ सामाजिक हस्तियाँ सक्रिय हैं।भोपाल से लेकर रीवा, सीधी, सतना और बुंदेलखंड क्षेत्र के संतों, साध्वियों, समाजसेवियों और सनातनी संगठनों से संवाद कर इसे जनांदोलन का रूप देने की तैयारी चल रही है।भागेश्वर धाम से आशीर्वाद लेकर डॉ. राकेश किशोर का खजुराहो में ऐतिहासिक संकल्पआयोजन से पूर्व डॉ. किशोर और उनके दिल्ली से आए अतिथि भागेश्वर धाम के परम पूजनीय धीरेंद्र शास्त्री महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके पश्चात वे प्रदेशभर के साधु-संतों से संवाद कर “खजुराहो चलो” अभियान को गति देंगे।YouTube से शुरू हुआ आंदोलन — अब बन रहा जनचेतना का स्वरइस आह्वान का विशेष वीडियो “CJI जूता कांड के वकील राकेश किशोर के साथ बिंदास मुलाकात” शीर्षक से YouTube पर जारी किया गया है।सोशल मीडिया और पोस्टरों के माध्यम से शुरू यह अभियान अब मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में सनातन चेतना जागरण का रूप ले चुका है।डॉ. किशोर का कहना है कि —“खजुराहो में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष ध्यान, भारत की आत्मा और सनातन धर्म की चेतना को पुनः जागृत करेगा। अब समय है — जागो और खजुराहो चलो।”लेखक परिचय:रविंद्र आर्य — विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं ]]></description>
                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 04:14:28 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ पहाड़ी परी को पूर्ण न्याय कब ]]></title>
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                <description><![CDATA[ रिपोर्ट: रविंद्र आर्यनई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र के बलजीत नगर इलाके में नाबालिग पहाड़ी परी के अपहरण और दुष्कर्म का मामला अब जनआक्रोश का रूप ले चुका है।स्थानीय नागरिकों और उत्तराखण्ड प्रवासी समाज ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर अपराध में न केवल 11 दिन की देरी की, बल्कि शुरुआत से ही मामले को हल्के में लिया।रिपोर्ट दर्ज करने में 11 दिन की देरीपरिजनों के अनुसार, बच्ची के लापता होने की सूचना 6 अक्टूबर को थाने में दी गई थी, परंतु एफआईआर 17 अक्टूबर को जाकर दर्ज की गई।परिवार के बार-बार निवेदन के बावजूद पुलिस ने “जांच जारी है” कहकर मामला टाल दिया।इस दौरान परिजन निराश होकर स्वयं खोजबीन करते रहे, पर उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।MDUPS संगठन की पहलस्थिति गंभीर होती देख महानगर दिल्ली उत्तराखण्ड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी अपने सदस्यों के साथ थाने पहुंचे।विरोध और दबाव के बाद 18 अक्टूबर को आखिरकार एफआईआर दर्ज हुई।संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 24 अक्टूबर तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया था, जबकि स्वयंसेवकों ने बच्ची की लोकेशन का पता लगाकर पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद पीड़िता बरामद हुई।मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टिमेडिकल जांच में नाबालिग के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई।इसके बावजूद पुलिस ने अब तक धारा 164 के अंतर्गत न्यायिक बयान दर्ज नहीं करवाए।मामले की सुनवाई “अगले मंगलवार” तक टल जाने से लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।धरना, प्रदर्शन और गिरफ्तारीप्यारे फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंजलि थपलियाल कौल, सामाजिक कार्यकर्ता रेखा हिन्दू देवी, आस्था माँ सुदर्शन चक्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद सिंह, और (MDUPS) संस्था के कमल ध्यानी के नेतृत्व में थाना परिसर के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया।लगातार दबाव और सोशल मीडिया अभियान के बाद पुलिस ने 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें 2 मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये लोग नाबालिग को बहला-फुसलाकर 9 दिनों तक एक किराए के मकान में रखते थे, जहाँ उसके साथ कई बार दुष्कर्म हुआ। तीन आरोपी बालिक खास समुदाय के अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।“यह केवल अपराध नहीं, समाज की चेतना की पराजय है” — डॉ. अंजलि थपलियाल कौल“जब मैंने उस नाबालिग बच्ची की हालत और उसके पिता का दर्द देखा, तो लगा कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक चेतना की पराजय है।आज की पीढ़ी में सोशल मीडिया की विकृत संस्कृति बच्चों की मासूमियत को निगल रही है।अब समय है कि हम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और करुणा की ओर लौटें — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रह सकें।” “पूर्ण न्याय नहीं तो आंदोलन होगा” — कमल ध्यानी“हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती।यदि न्याय में देरी हुई तो प्रवासी समाज राजधानी की सड़कों पर फिरसे उतरेगा।”मीडिया से अपीलइस सम्बन्ध मे जुड़े सभी संगठन ने स्वतंत्र और राष्ट्रहित पत्रकारों से अपील की है कि वे इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाएँ, ताकि जनता को यह पता चल सके कि कैसे राजधानी में भी एक नाबालिग बच्ची के लिए न्याय पाने की लड़ाई समाज को खुद लड़नी पड़ रही है।पहाड़ी परी की न्याय की लड़ाई अब सड़कों पर लड़ीबलजीत नगर का यह मामला केवल एक नाबालिग के साथ हुए अत्याचार का नहीं, बल्कि तंत्र की निष्क्रियता का प्रतीक बन गया है।अब सवाल यह है —* क्या दिल्ली में भी न्याय पाने के लिए संगठनों को फिर से धरना देना पड़ेगा?•क्या पुलिस की संवेदनशीलता अब केवल जनदबाव से जागती है?जब व्यवस्था मौन हो, तो समाज को आवाज़ उठानी ही पड़ती है — और साची बिस्ट का मामला उसी जागरण का प्रतीक है।लेखक: रविंद्र आर्य(भारतीय लोकसंस्कृति, समाज और सुरक्षा विषयों पर खोजपरक पत्रकारिता से जुड़े लेखक) ]]></description>
                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 03:50:26 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला ]]></title>
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                <description><![CDATA[ रिपोर्ट: रविंद्र आर्यनई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र के बलजीत नगर इलाके में नाबालिग साची बिस्ट के अपहरण और दुष्कर्म का मामला अब सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। परिवारजन का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में 11 दिन की देरी की और शुरुआती दौर में मामले को दबाने की कोशिश की गई।रिपोर्ट दर्ज करने में 11 दिन की देरीपीड़िता 6 अक्टूबर से लापता थी, लेकिन थाने में एफआईआर 17 अक्टूबर को दर्ज हुई। इस दौरान परिवारजन पुलिस से बार-बार गुहार लगाते रहे, मगर जवाब मिला — “जांच चल रही है।”MDUPS संगठन ने संभाली कमानपरिजनों की मदद को आगे आए महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी, जिन्होंने थाने में प्रदर्शन कर पुलिस को कार्रवाई के लिए विवश किया। भारी दबाव के बाद 18 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज की गई।पुलिस की निष्क्रियता पर तीखा विरोध24 अक्टूबर तक भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। MDUPS स्वयंसेवकों ने अपने स्तर पर साची की लोकेशन ट्रेस की और पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद लड़की बरामद हुई। मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि के बावजूद धारा 164 के तहत बयान नहीं करवाए गए।समाज और मीडिया की भूमिकाकमल ध्यानी ने मीडिया से अपील की है कि “यह मामला सिर्फ एक बच्ची का नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता का आईना है।”डॉ. अंजलि थपलियाल कौल, दिल्ली के प्यारे फाउंडेशन की अध्यक्ष, ने कहा —“साची बिस्ट जैसी घटनाएँ हमारी सामाजिक चेतना की असफलता हैं। अब वक्त है कि हम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिकता की ओर लौटें।”उठते सवालक्या न्याय पाने के लिए नागरिकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा?क्या पुलिस तभी जागती है जब जनता गुस्से में होती है?बलजीत नगर की यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि प्रणाली की संवेदनहीनता पर करारा तमाचा है।समाज अब एक स्वर में कह रहा है —“नाबालिग को न्याय दो, दोषियों को सजा दो!” ]]></description>
                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 02:44:42 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ सर्व समाज एकता संघ ने बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचाई राहत सामग्री ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली।सर्व समाज एकता संघ द्वारा दिल्ली में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्य चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष एड. आयुष कौशिक, राष्ट्रीय महामंत्री एड. वंश शर्मा और राष्ट्रीय सचिव साहिल कपूर के नेतृत्व में आवश्यक राशन व राहत सामग्री श्री जय सिंह (सदस्य — जिला कार्यकारिणी, मेहरौली) को उपलब्ध कराई गई। इस सामग्री में अनाज, सूखा राशन, बच्चों के लिए बिस्किट और तात्कालिक आवश्यक वस्तुओं के किट शामिल थे, जिन्हें सीधे प्रभावित परिवारों तक पहुँचाया जाएगा।एड. आयुष कौशिक ने बताया कि यह पहल एक तात्कालिक मानव सहायता अभियान है। संघ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ से प्रभावित कोई भी परिवार भूखा न सोए और सभी जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिले।बैठक में जिला अध्यक्ष बदरपुर (दिल्ली) श्री जगमोहन सिंह, जिला अध्यक्ष एटा (उ.प्र.) श्री अनुज यादव, जिला अध्यक्ष साउथ एक्सटेंशन (दिल्ली) श्री दीपु विराट सहित कई सदस्य मौजूद रहे। बैठक में संगठन के विस्तार, आगामी कार्यक्रमों और जनहित से जुड़ी गतिविधियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी मेहनत और ईमानदारी से करेंगे और इस मुहिम को आगे तक ले जाएंगे ताकि जरूरतमंद परिवारों तक अधिक से अधिक राहत पहुँच सके। ]]></description>
                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 23:59:19 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ लाल किले से 1 करोड़ का सोने का कलश चोरी ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लाल किले परिसर से जैन धर्म के एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य का सोने और कीमती पत्थरों से जड़ा कलश चोरी हो गया। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ी थी। इसी भीड़-भाड़ के दौरान किसी ने मौके का फायदा उठाकर हीरे, पन्नों और माणिक्य से जड़ा यह बहुमूल्य कलश गायब कर दिया। घटना सामने आने के बाद से पुलिस जांच में जुट गई है और लाल किले परिसर की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।चोरी हुआ कलश न केवल अपनी कीमत के कारण खास था, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी गहरा है। जैन धर्म में कलश को शुद्धता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में कलश की स्थापना शुभ मानी जाती है और इसे देवत्व का आवाहन करने का माध्यम समझा जाता है। यही कारण है कि इस कलश की चोरी से धार्मिक भावनाओं को भी गहरा आघात पहुंचा है।कलश का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे परंपरा और संस्कृति में भी विशेष स्थान प्राप्त है। सोने और रत्नों से जड़ा यह कलश जैन समाज के लिए श्रद्धा का प्रतीक था। इसकी खूबसूरती और भव्यता के साथ-साथ इसमें निहित आस्था ने इसे और अधिक खास बना दिया था।फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश जारी है। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है। ]]></description>
                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 03:36:33 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ शादी का कार्ड बना साइबर ठगी का नया हथियार ]]></title>
                <link>https://phmnews.com/delhi-news/wedding-card-becomes-a-new-weapon-of-cyber-fraud</link>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली। महाराष्ट्र के हिंगोली से साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने अब &quot;शादी का कार्ड&quot; को धोखाधड़ी का नया तरीका बना लिया है। इस स्कैम का शिकार होकर दो लोग, जिनमें से एक सरकारी कर्मचारी भी शामिल है, कुल 1 लाख 91 हजार रुपये गंवा बैठे।कैसे चलता है ये स्कैम?साइबर ठग व्हाट्सएप पर एक शादी का निमंत्रण कार्ड भेजते हैं। इस संदेश में आकर्षक पंक्तियाँ होती हैं—“शादी में ज़रूर आइए...”“प्रेम वह मास्टर Key है जो खुशियों के द्वार खोल देती है।”इस संदेश के साथ एक APK फाइल अटैच होती है, जिसे शादी के कार्ड के रूप में दिखाया जाता है। जैसे ही पीड़ित इस फ़ाइल को डाउनलोड करता है, उसके फोन का डेटा हैक हो जाता है। ठग बैंक खातों तक पहुंचकर पैसे निकाल लेते हैं।हिंगोली में एक सरकारी कर्मचारी ने जैसे ही इस फाइल को खोला, उसके खाते से 1.90 लाख रुपये उड़ गए। इसी तरह एक और व्यक्ति के खाते से भी रकम साफ हो गई।जांच में जुटी पुलिसशिकायत मिलने पर हिंगोली शहर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल इस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान मैसेज या लिंक पर क्लिक न करें।साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह स्कैम बेहद खतरनाक है क्योंकि यह लोगों की भावनाओं का फायदा उठाता है। वे चेतावनी देते हैं कि APK फाइल को कभी भी डाउनलोड न करें, क्योंकि इससे न केवल बैंक खाते खाली हो सकते हैं बल्कि फोन का संवेदनशील डेटा भी चोरी हो सकता है।यह घटना एक बार फिर बताती है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा है। ]]></description>
                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 00:04:18 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ]]></title>
                <link>https://phmnews.com/delhi-news/supreme-court-old-vehicle-ban-delhi-ncr-2025</link>
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                <description><![CDATA[ 🚗 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पुराने वाहनों पर जबरन कार्रवाई पर रोक, दिल्ली-NCR के वाहन मालिकों को राहतनई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 10 साल से पुराने डीज़ल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर जबरन कार्रवाई (जैसे जुर्माना, जब्ती या ईंधन आपूर्ति रोकना) पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह राहत कोर्ट ने 2018 के पुराने आदेश की पुनःसमीक्षा करते हुए दी है।🔹 क्या है मामला?2015 में NGT ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर बैन लगाया था।2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को मंजूरी दी।अब दिल्ली सरकार ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वाहन की उम्र नहीं, बल्कि वास्तविक प्रदूषण स्तर और फिटनेस के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।🔹 सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी&quot;पहले लोग गाड़ियाँ 40–50 साल तक रखते थे, आज भी विंटेज कारें हैं। केवल उम्र के आधार पर वाहन को खारिज करना उचित नहीं।&quot;कोर्ट ने केंद्र सरकार और Commission for Air Quality Management (CAQM) को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा।🔹 फिलहाल राहतजब तक अगली सुनवाई नहीं होती, पुराने वाहन मालिकों पर कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी।नवंबर 2025 में प्रस्तावित ईंधन आपूर्ति रोकने की योजना पर भी रोक लगी रहेगी।📅 अगली सुनवाईअगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी, जिसमें तय किया जाएगा कि उम्र आधारित बैन जारी रहेगा या वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण स्तर को प्राथमिकता दी जाएगी। ]]></description>
                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 05:19:34 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ भाजपा और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप ]]></title>
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                <description><![CDATA[ भाजपा और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप: वोटर लिस्ट में घोटाले का दावा, कहा– &quot;हम छोड़ेंगे नहीं&quot; नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025 —लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत में फर्जी वोटिंग बड़े पैमाने पर हो रही है, और यह सब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर किया जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे “वोटों की खुली लूट” करार दिया।राहुल गांधी ने कहा, “एग्जिट पोल और नतीजों के बीच फर्क साफ दिख रहा है। इससे न सिर्फ आम नागरिक बल्कि राजनीतिक दल भी भ्रमित हैं।”राहुल गांधी का ‘एटम बम’: चुनाव आयोग पर पांच बड़े आरोपराहुल गांधी ने पहले ही घोषणा की थी कि उनके पास चुनाव आयोग के खिलाफ एक &quot;एटम बम&quot; है। प्रेस वार्ता में उन्होंने इन तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए कहा कि कांग्रेस की 6 महीने लंबी जांच में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी उजागर हुई है।वोट चोरी के पांच तरीके, राहुल का दावा:डुप्लीकेट वोटर्स – 11,965फर्जी/अमान्य पते – 40,009एक ही पते पर बल्क वोटर रजिस्ट्रेशन – 10,452अवैध फोटो आईडी – 4,132फॉर्म-6 का दुरुपयोग – 30,000महादेवपुरा सीट से खुला घोटाले का राजराहुल गांधी ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस की हार के बाद जांच शुरू की गई। &quot;इस सीट पर हम 32,707 वोट से हारे, जबकि भाजपा को भारी बढ़त मिली। जब हमने पड़ताल की तो पता चला कि इस सीट पर 1 लाख से अधिक डुप्लीकेट या फर्जी वोटर हैं।&quot;उन्होंने बताया कि कुछ घरों में 80 से ज्यादा वोटर पंजीकृत थे, जबकि हजारों मकानों का पता ‘शून्य’ दर्शाया गया। “यह एक राज्य की बात नहीं, देशभर में संगठित रूप से वोटर लिस्ट में हेराफेरी हो रही है।”चुनाव आयोग से राहुल गांधी के सवाल:क्या देश की वोटर लिस्ट पारदर्शी और प्रमाणिक है?आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा साझा क्यों नहीं करता?फर्जी वोटर्स और डुप्लीकेट एंट्री पर क्यों चुप्पी?राहुल ने कहा, “हमने बार-बार डेटा मांगा, लेकिन चुनाव आयोग ने न तो जवाब दिया, न ही डेटा साझा किया। क्या आयोग किसी से डर रहा है?”चुनाव आयोग को चेतावनीराहुल गांधी ने चुनाव आयोग को सीधे शब्दों में चेताया—“चाहे आप जूनियर हों या सीनियर अधिकारी, हम आपको नहीं छोड़ेंगे। यह लोकतंत्र की नींव के साथ खिलवाड़ है। जनता को जवाब चाहिए।”यह मुद्दा सिर्फ चुनावी नहीं, लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। कांग्रेस ने अब यह डेटा सार्वजनिक करने का फैसला किया है। आने वाले समय में यह मामला देशभर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकता है। ]]></description>
                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 05:42:31 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ जातिगत जनगणना पर केंद्रित हुई ऐतिहासिक बैठक ]]></title>
                <link>https://phmnews.com/delhi-news/historical-meeting-focused-on-caste-census</link>
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                <description><![CDATA[ रिपोर्ट: रविंद्र आर्यनई दिल्ली | 7 अगस्त 2025भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें महर्षि बाल्मीकि महापंचायत से जुड़े हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब के प्रमुख समाजसेवी शामिल हुए।इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल सिंह आर्य ने की, जबकि महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।बैठक का उद्देश्य था—बाल्मीकि समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक उत्थान की रणनीति तय करना और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित जातिगत जनगणना पर समाज का साझा मत प्रस्तुत करना।श्री सुरेन्द्र चौधरी ने कहा,“यह समाज आज भी मुख्यधारा से बहुत पीछे छूट गया है। इसके विकास के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, योजनाबद्ध प्रयास और संवेदनशील नेतृत्व की आवश्यकता है।”बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए जातिगत जनगणना के ऐतिहासिक निर्णय का खुले मन से स्वागत किया।जातिगत जनगणना का बाल्मीक समाज ने मोदी का आभार व्यक्त किया।सभी वक्ताओं ने इसे वंचित समाजों के लिए निर्णायक पहल बताते हुए कहा कि यह जनगणना सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को दूर करने में सहायक होगी।“जातिगत जनगणना हमारे समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जो दशकों की अनदेखी और उपेक्षा को समाप्त कर सकता है,” – महापंचायत प्रतिनिधियों का स्पष्ट मत।लाल सिंह आर्य ने जातिगत जनगणना को बताया सामाजिक न्याय की आधारशिलाबैठक को संबोधित करते हुए श्री लाल सिंह आर्य ने कहा:“महर्षि बाल्मीकि न केवल एक महाकाव्यकार थे, बल्कि वे सामाजिक क्रांति के प्रतीक हैं। आज उनके वंशजों को भी सम्मान, अवसर और प्रतिनिधित्व की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी किसी और को।”उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना सिर्फ आँकड़ों का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव है।उन्होंने आश्वस्त किया कि भाजपा का SC मोर्चा बाल्मीकि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव नीति-निर्धारण में भागीदारी करेगा।मुख्य बिंदु जो बैठक में चर्चा का केंद्र बने:* जातिगत जनगणना की आवश्यकता और सामाजिक न्याय में उसका योगदान* बाल्मीकि समाज को शिक्षा, नौकरियों और राजनीतिक भागीदारी में समुचित अवसर* सफाईकर्मियों और सामाजिक रूप से वंचित तबकों के लिए विशेष कौशल विकास योजनाएं* महर्षि बाल्मीकि की गौरवशाली परंपरा को पुनः स्थापित करने हेतु सांस्कृतिक अभियानों की मांग* केंद्र सरकार से एक विशेष मंत्रालय या बोर्ड की स्थापना की माँग, जो सिर्फ बाल्मीकि समाज से संबंधित योजनाओं पर कार्य करेभाजपा सरकार से अपेक्षाएं और समाज की ओर से प्रस्तावबाल्मीकि समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने सरकार से अपनी अपेक्षाएँ स्पष्ट रूप से रखते हुए कहा कि:* जातिगत जनगणना के आँकड़ों के आधार पर योजनाओं का पुनर्गठन किया जाए* केंद्र और राज्य स्तर पर बाल्मीकि प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की प्रक्रिया तेज की जाए* मलिन बस्तियों, झुग्गियों और सफाईकर्मियों की दशा सुधारने हेतु विशेष बजट निर्धारित हो* शैक्षणिक संस्थानों में बाल्मीकि समाज के छात्रों को विशेष छात्रवृत्तियाँ और आरक्षण मिलेअंतिम संदेश: मोदी सरकार को आभार और विकास की अपीलबैठक का समापन करते हुए महापंचायत और SC मोर्चा के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि“अब समय आ गया है जब सिर्फ राजनीतिक समर्थन नहीं, आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सम्मान और व्यावहारिक नीतियाँ ही समाज को आगे बढ़ा सकती हैं।”बाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना के निर्णय के लिए धन्यवाद देते हुए इसे वंचितों के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया।उन्होंने भाजपा नेतृत्व से अपील की:“बाल्मीकि समाज को भारत के विकास के केंद्र में लाने के लिए अब ठोस और समयबद्ध कार्यवाही ज़रूरी है।”लेखक: रविंद्र आर्यस्वतंत्र पत्रकार एवं राष्ट्रवादी विचारक ]]></description>
                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 05:18:02 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ फतेहपुर के बच्चों ने पीएम मोदी को राखी भेजकर मांगा पृथक बुंदेलखंड राज्य ]]></title>
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                <description><![CDATA[ फतेहपुर |&quot;एक राखी बुंदेलखंड के नाम&quot; महाअभियान के 23वें दिन फतेहपुर जिले के प्राथमिक विद्यालय खखरेरू में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने भावनाओं को झकझोर दिया। विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने छोटे-छोटे हाथों से बनी राखियाँ और भावनात्मक पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे, जिनमें उन्होंने पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग की।बच्चों ने अपने पत्रों में लिखा:&quot;हमें चाहिए अपना बुंदेलखंड राज्य।&quot;बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय &#039;बुंदेलखंडी&#039; ने इस अवसर पर कहा,&quot;जब बच्चों की कलाइयों से राखियाँ और आंखों से उम्मीदें निकलती हैं, तब यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जन-जन की आत्मा का भाव बन जाता है। ये राखियाँ अब सिर्फ रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि न्याय और अधिकार की पुकार हैं।&quot;उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के अंतर्गत हर जिले से हजारों राखियाँ प्रतिदिन प्रधानमंत्री को भेजी जा रही हैं, जो यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि अब बुंदेलखंड प्रतीक्षा नहीं, निर्णय चाहता है।इस आयोजन में स्थानीय शिक्षक, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बच्चों ने “बुंदेलखंड मांगे हक” और “हमारा राज्य कब बनेगा?” जैसे नारे लगाकर अपने क्षेत्र के लिए भाव प्रकट किए।यह आयोजन इस बात का संकेत है कि बुंदेलखंड राज्य की मांग अब केवल ज्ञापनों और मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यालयों और भावी पीढ़ी के मन तक पहुंच चुकी है। ]]></description>
                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 23:32:02 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ special-intensive-revision-sir-exercise : चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ प्रक्रिया को लेकर बवाल ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 25 जुलाई।भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से घोषणा की कि वह देशभर में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लागू करने जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा की जाएगी, जिससे मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सके। हालांकि, इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग की इस कवायद पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे &quot;वोटबंदी की साजिश&quot; करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार और उसके सहयोगी संगठन आरएसएस (RSS) इस प्रक्रिया के जरिए दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों के वोट काटने की योजना पर काम कर रहे हैं।चुनाव आयोग पर निष्पक्षता को लेकर उठे सवालविपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, लेकिन वह अब भाजपा और आरएसएस के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। नेताओं का कहना है कि SIR को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कमजोर वर्गों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सके।बिहार में पहले से चल रही इसी तरह की प्रक्रिया को उदाहरण देते हुए बताया गया कि किस तरह BLO (Booth Level Officers) कुछ खास समुदायों के लोगों से अनावश्यक रूप से नए फॉर्म भरवा रहे हैं और पुराने वोटर हटाए जा रहे हैं। आरोप है कि यह रणनीति अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जा रही है।संविधान और लोकतंत्र पर &#039;सुनियोजित हमला&#039;?कई नेताओं ने इस मुद्दे को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ &quot;सुनियोजित हमला&quot; करार दिया है। उनका कहना है कि भाजपा को डॉ. भीमराव अंबेडकर और पंडित नेहरू द्वारा बनाए गए संविधान से परेशानी है और वह बार-बार उसमें बदलाव के प्रयास कर रही है। विपक्ष का मानना है कि SIR जैसी प्रक्रिया को लागू कर, सरकार एक ‘मनुस्मृति आधारित शासन व्यवस्था’ की ओर बढ़ रही है।चुनाव आयोग की मंशा पर उठे सवालहालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अद्यतन बनाना है ताकि डुप्लीकेट, मृत और गलत नामों को हटाया जा सके। लेकिन इस पर अब संदेह जताया जा रहा है कि कहीं इसके जरिए एक छुपा हुआ राजनीतिक उद्देश्य तो पूरा नहीं किया जा रहा?निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांगविपक्ष और कई नागरिक संगठनों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि SIR प्रक्रिया को लागू करने से पहले सार्वजनिक चर्चा, पारदर्शिता, और निगरानी की स्वतंत्र व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि इससे किसी भी समाज के वर्ग को भेदभावपूर्ण तरीके से मताधिकार से वंचित न किया जाए।देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और समावेशिता पर उठ रहे सवाल न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियादी आत्मा को भी झकझोरते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है, और SIR प्रक्रिया को कैसे निष्पक्ष और पारदर्शी बनाता🚨 चुनाव आयोग ने देशभर में Special Intensive Revision (SIR) लागू करने का एलान किया है।विपक्ष का आरोप —SIR के ज़रिए दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साज़िश!क्या ये ‘वोटबंदी’ नहीं?EC की निष्पक्षता पर उठे सवाल।@RahulGandhi #ElectionCommission #SIR @kharge pic.twitter.com/pBS7KVpC9E— PHM NEWS (@PHM_NEWS) July 25, 2025  ]]></description>
                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 00:38:30 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की आत्मा है ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली। वरिष्ठ चिंतक और समाजशास्त्री हंसाराम ने एक कार्यक्रम में कहा कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन यह स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ ही सार्थक होती है।” उन्होंने कहा कि समाज की संरचना कुछ अनिवार्य शर्तों के साथ हुई थी, जिनमें व्यक्तिगत मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ समाज के कल्याण को सर्वोपरि रखा जाना प्रमुख था।प्रसिद्ध दार्शनिक जेरमी बेंथम के &#039;सबके लिए सबसे बड़ा सुख&#039; के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए हंसाराम ने कहा कि आधुनिक कानून इसी विचारधारा पर आधारित हैं। भारत में भी संविधान ने अनुच्छेद 19(1) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) के माध्यम से उस पर कुछ आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि यह स्वतंत्रता समाज के हित के विरुद्ध न जाए।उन्होंने चेताया कि आज सोशल मीडिया और इंटरनेट की सर्वसुलभता ने हर व्यक्ति को बोलने का मंच तो दिया है, लेकिन इसके साथ ही भ्रामक, अश्लील और समाज-विरोधी सामग्री की बाढ़ भी आ गई है। &quot;यह कहना कि लोग यही सब देखना चाहते हैं, एक प्रकार की बौद्धिक लाचारी है,&quot; उन्होंने स्पष्ट कहा।हंसाराम ने विशेष रूप से यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को संबोधित करते हुए कहा कि उनके विचार लाखों लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं। ऐसे में उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कंटेंट के जरिए समाज की नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखें, न कि उन्हें तोड़ें।उन्होंने कहा, &quot;स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है, बल्कि कर्तव्य भी है। अगर हम इसका दुरुपयोग करते हैं, तो यह समाज में अराजकता और असंतुलन को जन्म देता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उद्देश्य समाज को दिशा देना है, न कि उसे भ्रमित करना।&quot;अंत में, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक हित की सीमाओं को तय करते हुए इस स्वतंत्रता को सुरक्षित और मर्यादित रखे। तभी लोकतंत्र मजबूत और स्थायी रह सकेगा। ]]></description>
                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 19:11:22 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ ब्रेकिंग न्यूज़: गरीब की जेब पर सरकार का डबल वार ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली। आम जनता को एक और बड़ा झटका देते हुए सरकार ने आज पेट्रोल और डीजल के साथ घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भी भारी बढ़ोतरी कर दी है। घरेलू गैस सिलेंडर अब ₹50 महंगा हो गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।देशभर में पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रही जनता को अब पेट्रोल, डीजल और गैस तीनों मोर्चों पर बढ़ी कीमतों का सामना करना पड़ेगा। राजधानी दिल्ली में अब घरेलू गैस सिलेंडर का दाम ₹1,100 के पार पहुँच गया है, जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी ₹2 से ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ाई गई हैं।विपक्ष ने इस फैसले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि यह सीधा गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों की कमर तोड़ने वाला निर्णय है। सोशल मीडिया पर भी जनता का गुस्सा फूट पड़ा है, लोग हैशटैग #महंगाई_की_मार और #GasPriceHike के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।जनता सवाल कर रही है — &quot;कब मिलेगी राहत?&quot;#महंगाई_कीमार #गरीब_की_जेब_खाली #सरकार_का_डबल_वार #पेट्रोल_डीजल_महंगा #गैस_सिलेंडर_कीमत #मिडल_क्लास_परेशान #महंगाई_की_मार #जनता_परेशान #आम_आदमी_की_तकलीफ #₹50_का_झटका ]]></description>
                <pubDate>Tue, 08 Apr 2025 00:17:54 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ दिल्ली मेट्रो में बुजुर्ग और युवक के बीच हाथापाई ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली: राजधानी की मेट्रो में सफर के दौरान एक अजीबोगरीब घटना देखने को मिली, जब एक बुजुर्ग और युवक के बीच धक्का-मुक्की के बाद हाथापाई हो गई। इस दौरान बुजुर्ग ने युवक को पीट दिया, और यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद किसी यात्री ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मेट्रो में भीड़ अधिक थी, और इसी दौरान किसी बात को लेकर बुजुर्ग और युवक के बीच कहासुनी हो गई। दोनों के बीच पहले धक्का-मुक्की हुई, फिर बुजुर्ग ने गुस्से में युवक को मारना शुरू कर दिया। इस बीच अन्य यात्रियों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।दिल्ली मेट्रो प्रशासन ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए यात्रियों से अपील की है कि वे मेट्रो में शांति बनाए रखें और किसी भी विवाद से बचें। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन और संयम बनाए रखना सभी यात्रियों की जिम्मेदारी है।🚇 #दिल्लीमेट्रो में बुजुर्ग और युवक के बीच धक्का-मुक्की के बाद  हाथापाई! 📌 बुजुर्ग ने युवक को पीटा, वीडियो हुआ वायरल 📌 यात्रियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया 📌 मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों से शांति बनाए रखने की अपील की 🛑#DelhiMetro #ViralVideo #BreakingNews pic.twitter.com/mdxt9KEsU0— PHM NEWS (@PHM_NEWS) March 8, 2025 हालांकि, इस घटना के पीछे की असल वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग बुजुर्ग का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि युवक को भी अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। ]]></description>
                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 19:34:55 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ दिल्ली  यमुना आरती के साथ नई सरकार का आगाज ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली की नवगठित भाजपा सरकार के लिए यमुना नदी की सफाई सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। गुरुवार को शपथ लेने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने सभी कैबिनेट सहयोगियों के साथ वासुदेव घाट पहुंचीं, जहां उन्होंने यमुना आरती की। इस आयोजन ने सरकार की यमुना स्वच्छता अभियान के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट कर दिया।यमुना आरती के तुरंत बाद पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंत्री प्रवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कपिल मिश्रा, रविंद्र इंद्रराज और पंकज कुमार सिंह शामिल हुए। ये सभी नेता रेखा गुप्ता के साथ मंत्री पद की शपथ ले चुके थे। इस अवसर पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत कई वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद भी उपस्थित रहे। मंत्रोच्चार के बीच यमुना आरती संपन्न हुई, जहां मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की।यमुना सफाई भाजपा के एजेंडे में शीर्ष परदिल्ली में बीते 10 वर्षों से सत्ता में रही आम आदमी पार्टी ने यमुना को स्वच्छ करने के कई वादे किए, लेकिन दो कार्यकाल बाद भी नदी की स्थिति जस की तस बनी रही। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था, और अब सरकार बनने के बाद इसे अपनी प्राथमिकता में रखा है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के सपने को साकार करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिल्ली में जनता के हर पैसे का हिसाब रखा जाएगा और अगले तीन वर्षों में यमुना को पूरी तरह स्वच्छ करने की रणनीति तैयार की गई है।यमुना सफाई का कार्य हुआ तेजविधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही यमुना से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया गया था। सरकार गठन से कुछ दिन पहले दिल्ली के उपराज्यपाल ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इसके बाद दिल्ली के विभिन्न इलाकों में यमुना से गाद और खरपतवार हटाने का काम तेज कर दिया गया है।भाजपा सरकार का यह कदम दिल्ली में यमुना को निर्मल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में यमुना स्वच्छता को लेकर सरकार गंभीर रूप से काम करेगी। ]]></description>
                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 18:51:37 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ दिल्ली को मिली नई मुख्यमंत्री, रेखा गुप्ता ने ली शपथ ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली को नई मुख्यमंत्री के रूप में रेखा गुप्ता मिली हैं। आज रामलीला मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। उनके साथ छह मंत्रियों ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें प्रवेश वर्मा, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविंदर इंद्राज सिंह, कपिल मिश्रा और पंकज कुमार सिंह शामिल हैं​रेखा गुप्ता कौन हैं?रेखा गुप्ता भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता हैं और उन्होंने शालीमार बाग विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी बंदना कुमारी को लगभग 29,000 वोटों के अंतर से हराया था​। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी रही हैं और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की पूर्व अध्यक्ष भी रह चुकी हैं​बीजेपी की 27 साल बाद सत्ता में वापसीदिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी को 70 में से 48 सीटों पर जीत मिली, जिससे पार्टी ने 27 साल बाद दिल्ली में सरकार बनाई। रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनी हैं, इससे पहले सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी इस पद पर रह चुकी हैंशपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन मौजूद रहा?शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे। समारोह के लिए तीन अलग-अलग मंच तैयार किए गए थे—एक मुख्य मंच पर गणमान्य लोग, दूसरे मंच पर धार्मिक नेता और तीसरे मंच पर संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया था​   ]]></description>
                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 20:45:50 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ SSC JE Mains 2024: 16 गलत सवालों को लेकर छात्रों में रोष, री-एग्जाम की मांग ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित जूनियर इंजीनियर (JE) मेन्स परीक्षा 2024 में गड़बड़ी सामने आई है। यह परीक्षा 6 नवंबर 2024 को आयोजित की गई थी, जिसका फाइनल रिजल्ट 3 फरवरी 2025 को घोषित कर दिया गया। इसके बाद 19 फरवरी 2025 को आयोग ने आधिकारिक वेबसाइट पर फाइनल आंसर की और स्कोर कार्ड जारी किया।छात्रों का आरोप है कि इस फाइनल आंसर की में 16 प्रश्न गलत हैं। आयोग ने इन गलत प्रश्नों के लिए सभी परीक्षार्थियों को समान रूप से अंक दे दिए, जिससे प्रतियोगिता का सही आकलन नहीं हो सका। इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होने की आशंका बढ़ गई है।छात्रों की मांग:SSC के इस फैसले से नाराज अभ्यर्थी अब परीक्षा के पुनः आयोजन (Re-Exam) की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन 16 प्रश्नों का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं हुआ, जिससे परीक्षा की मेरिट सूची प्रभावित हो सकती है।छात्र अब सोशल मीडिया पर #SSCJE_ReExam की मांग को ट्रेंड करा रहे हैं और आयोग से इस पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक SSC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।क्या SSC छात्रों की मांग पर विचार करेगा या फिर इस मामले को यथावत रखेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। ]]></description>
                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 19:32:35 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ Delhi Chunav Result 2025 LIVE ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली विधानसभा सीटआम आदमी पार्टी को यहां बड़ा झटका लगा है। नई दिल्ली सीट से पूर्व सीएम और आप प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल हार गए हैं। भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा जीत गए हैं। कांग्रेस ने इस सीट से संदीप दीक्षित को चुनावी मैदान में उतारा था। नई दिल्ली सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा ने कहा, &quot;मैं सभी दिल्ली वासियों को बधाई देता हूं, उनका धन्यवाद करता हूं। दिल्ली में बनने वाली यह सरकार प्रधानमंत्री के विजन को दिल्ली में लेकर आएगी। मैं इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को देता हूं। मैं दिल्ली की जनता का धन्यवाद करता हूं। यह जीत प्रधानमंत्री मोदी और दिल्ली की जनता की जीत है। बता दें कि लगातार तीन बार इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 2013 विधानसभा चुनाव में शिकस्त देकर अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे। उन्होंने लगातार तीन बार इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया।कालकाजी विधानसभा सीटकालकाजी सीट से आप प्रत्याशी आतिशी चुनाव जीत गई हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी को हराया है। बता दें कि कालकाजी सीट सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। इस बार आम आदमी पार्टी ने कालकाजी सीट से मुख्यमंत्री आतिशी को टिकट दिया। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक अलका लांबा को उतारा। इन चेहरों के कारण कालकाजी सीट एक बार फिर हॉट सीट बन गई। वहीं भाजपा ने यहां से रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया। कालका सीट से उम्मीदवार बनाए गए बिधूड़ी अपने बयानों की वजह से विवादों में रहते हैं। जंगपुरा विधानसभा सीट जंगपुरा सीट से आप प्रत्याशी मनीष सिसोदिया हार गए हैं। भाजपा के प्रत्याशी तरविंदर सिंह मारवाह ने यहां जीत दर्ज की है। हार के बाद आम आदमी पार्टी नेता और जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार मनीष सिसोदिया ने कहा, &quot;जंगपुरा के लोगों ने बहुत प्यार दिया लेकिन लगभग 600 वोट से हम पीछे रह गए। जो उम्मीदवार जीते हैं, हम उन्हें बधाई देते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जंगपुरा के लोगों की समस्याओं को वे हल करेंगे।&quot;करावल नगर विधानसभा सीटकरावल नगर सीट से भाजपा के कपिल मिश्रा जीत गए हैं। आम आदमी पार्टी के मनोज त्यागी को उन्होंने हराया है।पटपड़गंज विधानसभा सीट पटपड़गंज सीट पर भाजपा के अवध ओझा हार गए हैं। भाजपा के रवींद्र सिंह नेगी ने यहां जीत दर्ज की है। हारने के बाद पटपड़गंज विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार अवध ओझा ने कहा, &quot;मैं जनता का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं दूसरे स्थान पर आया, अगली बार खुद को शीर्ष पर लाने की कोशिश करूंगा। चूक यह हुई कि मैं सभी से मिल नहीं पाया, शायद मुझे इसके लिए अच्छा समय नहीं मिला लेकिन फिर भी मैं इस हार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेता हूं।&quot;पटपड़गंज विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रविंदर सिंह नेगी ने कहा, &quot;मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि हमने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा। यह उनका आशीर्वाद था, जिस तरह से उन्होंने आम आदमी पार्टी को आपदा कहा, उन्होंने कहा आपदा हटाओ, दिल्ली बचाओ। लोगों ने इसे स्वीकार भी किया। शीर्ष नेतृत्व के नेतृत्व में हमें जीत मिली है, मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं।&quot;बल्लीमारान विधानसभा सीटदिल्ली सरकार में मौजूदा कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन बल्लीमारान सीट से जीत दर्ज की हैं। भाजपा के प्रत्याशी कमल बागड़ी को उन्होंने हराया हैं। इमरान हुसैनके सरकार के मंत्री होने के चलते यह सीट भी हॉट सीट बनी हुई है। कांग्रेस की तरफ से हारून यूसुफ चुनावी मैदान में है। हारून यूसुफ भी दिल्ली सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं। इसलिए इस सीट के रिजल्ट पर हर किसी की नजर है।बाबरपुर विधानसभा सीटबाबरपुर विधानसभा सीट के रुझानों में आप के प्रत्याशी गोपाल राय जीत गए हैं। भाजपा के प्रत्याशी अनिल वशिष्ठ हार गए हैं। गोपाल राय पिछले 10 साल से केजरीवाल की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। जिसके चलते यह सीट काफी चर्चा में रही है। इसलिए इस सीट के चुनाव परिणाम को लेकर भी लोगों में उत्सुकता देखने को मिली।ग्रेटर कैलाश विधानसभा सीटआम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सौरभ भारद्वाज हार गए हैं। भाजपा की शिखा राय ने उन्हें हराया है। शकूर बस्ती विधानसभा सीटभाजपा के प्रत्याशी करनैल सिंह शकूरबस्ती सीट से जीत गए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सत्येंद्र जैन को उन्होंने हराया है। ओखला विधानसभा सीटआम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अमानतुल्लाह खान जीत गए हैं। भाजपा के मनीष चौधरी को उन्होंने हराया है।बिजवासन विधानसभा सीटरुझानों में बिजवासन विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी कैलाश गहलोत जीत गए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सुरेंद्र भारद्वाज को उन्होंने हराया है।रोहिणी विधानसभा सीटइस सीट पर अब भाजपा प्रत्याशी विजेंद्र गुप्ता जीत गए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप मित्तल को उन्होंने हराया है।वजीरपुर विधानसभा सीटइस सीट पर अब भाजपा प्रत्याशी पूनम शर्मा जीत गई हैं। आम आदमी पार्टी प्रत्याशी राजेश गुप्ता को उन्होंने हराया है।   ]]></description>
                <pubDate>Sat, 08 Feb 2025 22:51:02 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ मुसलमानों ने बीजेपी को हराने का ठेका नहीं ले रखा है ]]></title>
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                <description><![CDATA[ नई दिल्ली : दिल्ली में विधानसभा चुनाव के प्रचार सोमवार शाम को थम गया। वोटिंग से दो दिन पहले प्रमुख राजनीतिक दलों, खासकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस की नजरें मुस्लिम बहुल मानी जाने वाली करीब 22 सीटों पर टिकी हैं। इनमें से पांच सीट सीलमपुर, मुस्तफाबाद, मटिया महल, बल्लीमारान और ओखला सीट से अक्सर मुस्लिम उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंचते रहे हैं, भले ही वे किसी भी दल से हों।18 सीटों पर मुस्लिम आबादी 10 से 40 फीसदीइसके अलावा बाबरपुर, गांधीनगर, सीमापुरी, चांदनी चौक, सदर बाजार, किराड़ी, जंगपुरा व करावल नगर समेत 18 सीट ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 10 से 40 फीसदी मानी जाती है और इन क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय निर्णायक भूमिका अदा करता रहा है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली में मुस्लिम आबादी करीब 13 फीसदी थी। जानकार मानते हैं कि इस बार मुस्लिम मतदाता सत्तारूढ़ ‘आप’ और कांग्रेस को लेकर असमंजस में है।जानकारों के मुताबिक, दिल्ली के मुस्लिम मतदाता परंपरागत तौर पर कांग्रेस को वोट देते आए हैं लेकिन 2015 में वह कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़ ‘आप’ के पाले में चले गए और 2020 के चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय ने और मजबूती से सत्तारूढ़ दल को समर्थन दिया जिस वजह से ज्यादातर मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।मगर उत्तर पूर्वी दिल्ली के 2020 के दंगे, कोरोना वायरस महामारी के दौरान उपजे तब्लीगी जमात के मुद्दे और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की कथित चुप्पी से माना जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं में ‘आप’ को लेकर नाराज़गी है।हालांकि मुस्लिम राजनीति के जानकार एवं ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) में एसोसिएट प्रोफेसर हिलाल अहमद ने कहा कि जहां तक मुस्लिम वोटों का सवाल है, आप” को निश्चित रूप से बढ़त हासिल है। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उसके पास जमीनी स्तर के कार्यकर्ता और दूसरे स्तर का नेतृत्व है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुस्लिम समुदायों के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता और वह भी अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रही है।अहमद ने कहा कि इस संदर्भ में मतदाताओं की समझ को ध्यान में रखना चाहिए। मेरे विचार से दिल्ली के मुस्लिम मतदाता, अन्य सामाजिक समूहों की तरह, समझदार तरीके से मतदान करने जा रहे हैं। आखिरकार यह एक विधानसभा चुनाव है जहां मतदाता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ निकटता महसूस करता है।सीलमपुर विधानसभा के चौहान बांगर में रहने वाले व आयुष मंत्रालय से सेवानिवृत्त हुए डॉक्टर सैयद अहमद खान ने कहा कि इस बार वोट अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर नहीं बल्कि स्थानीय उम्मीदवार को देखकर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने अपनी जो छवि बनाई थी वो बीते पांच साल में काफी खराब हुई है, क्योंकि ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक मुस्लिम समुदाय से जुड़े किसी मुद्दे पर नहीं बोले।आप को वोट देना ही समझदारी&#039;खान से जब यह सवाल किया गया कि ‘आप’ कह रही है कि उसे वोट नहीं दिया तो भाजपा आ जाएगी, इस पर उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, कि मुसलमानों ने बीजेपी को हराने का ठेका नहीं ले रखा है। जाफराबाद इलाके में हलवाई की दुकान चलाने वाले मोहम्मद यामीन कहते हैं कि यह सही है कि केजरीवाल मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों पर नहीं बोले, लेकिन हमारे पास कोई ऐसा विकल्प नहीं है, जहां हम जा सकें। इसलिए ‘आप’ को ही वोट देना समझदारी है।सीलमपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर एक अन्य मुस्लिम बहुल सीट ओखला के जामिया नगर में रहने वाले फरीद असकरी ने कहा कि मुसलमानों के पास आप को वोट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि बड़ी तस्वीर में केवल ‘आप’ ही भाजपा को सत्ता में आने से रोक रही है। यही बात शाहदरा जिले के बाबरपुर इलाके में रहने वाले व तब्लीगी जमात से जुड़े अब्दुल रहमान भी कहते हैं कि बीजेपी को रोकने के लिए ‘आप’ ही विकल्प है।ओखला के मुर्तुजा नैयर ने कहा, &quot;मेरा दिल कांग्रेस कहता है, लेकिन दिमाग आप कहता है। राहुल गांधी सही मुद्दे उठाते रहे हैं और अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के लिए लड़ते रहे हैं, इसलिए वह हमारे वोट के हकदार हैं, लेकिन डर है कि वोट बंट सकते हैं और भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है।&quot;पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के कूचा चालान इलाके के निवासी व एक होटल में नौकरी करने वाले उबैद कहते हैं कि केजरीवाल मुस्लिम मुद्दों पर नहीं बोलते हैं, फिर भी वह बीजेपी से बेहतर हैं और उनकी कई योजनाओं से घरेलू बजट ठीक रहता है, इसलिए उन्होंने ‘आप’ को वोट देने का फैसला किया है।दंगा प्रभावित उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के शेरपुर चौक के पास रहने वाले और सीट कवर सीने का काम करने वाले 36 वर्षीय अकबर ‘आप’ सरकार की फ्री बिजली-पानी और मोहल्ला क्लिनिक योजना से खासे प्रभावित हैं, और कहते हैं कि वह इस बार भी ‘झाड़ू’ को ही वोट देंगे।कांग्रेस के पक्ष में भी आवाजेंऐसा नहीं है कि सारे मतदाताओं का रुख यही है। कुछ कांग्रेस को वोट देने की भी बात करते हैं। बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र के फराशखाना इलाके में रहने वाले वसीम शाहनवाज़ ने कहा कि वह पिछले दो चुनाव से ‘आप’ को वोट देते आए हैं, लेकिन इस बार उन्होंने कांग्रेस को वोट देने का फैसला किया है। इसकी वजह पूछने पर वह कहते हैं कि जब भी मुस्लिमों से जुड़ा कोई मुद्दा होता है तो केजरीवाल खमोशी अख्तियार कर लेते हैं। ]]></description>
                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 22:21:45 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ प्रत्याशी कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली हाई कोर्ट अधिवक्ता खुशवंत सभरवाल ने ]]></title>
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                <description><![CDATA[ दिल्ली। बुधवार को मौनी अमावस के दिन महाकुंभ मेले में हुई घटना को लेकर प्रत्याशी कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली हाई कोर्ट अधिवक्ता खुशवंत सभरवाल  ने दुख प्रकट करते हुए जनता से अपील की है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ मेले के 45 किलोमीटर का क्षेत्र त्रिवेणी क्षेत्र है।इसलिए एक ही जगह लोग स्नान करने के लिए इकट्ठा ना हो। 45 किलोमीटर का महाकुंभ क्षेत्र पूरा पुण्य स्थल है और इस दौरान इस क्षेत्र में कोई भी स्नान करेगा तो उसे वही पुण्य लगेगा। साथ ही खुशवंत सभरवाल ने कहा कि अभी महाकुंभ बहुत लंबा चलेगा, 26 फरवरी तक मेला चलेगा। इसलिए रुक-रुक कर स्नान करने जाएं।प्रत्याशी खुशवंत सभरवाल ने कहा कि अभी 2 दिन पहले ही मैं भी अपने परिवार के साथ महाकुंभ में स्नान करने गया था जहां पर लोगों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान रखा गया था लेकिन अचानक से हुए इस हादसे ने मुझे झकझोर के रख दिया है। ]]></description>
                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 00:25:29 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[ दिल्ली में चुनावी दंगल ]]></title>
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                <description><![CDATA[ महिलाओं के लिए योजनाएं:आप (AAP):आम आदमी पार्टी ने महिलाओं के लिए ‘महिला सम्मान योजना’ का वादा किया है, जिसमें हर महीने ₹2,100 दिए जाएंगे।बीजेपी (BJP):भारतीय जनता पार्टी ‘महिला समृद्धि योजना’ के तहत महिलाओं को ₹2,500 हर महीने देने का वादा कर रही है।कांग्रेस (Congress):कांग्रेस ‘प्यारी दीदी योजना’ लेकर आई है, जिसमें हर महिला को ₹2,500 मासिक देने का प्रावधान है।शिक्षा और छात्र लाभ:आप (AAP):‘आंबेडकर स्कॉलरशिप’ के जरिए दलित छात्रों को मदद देने का वादा किया गया है।बीजेपी (BJP):सभी जरूरतमंद छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा देने की योजना है।कांग्रेस (Congress):बेरोजगार युवाओं के लिए ₹8,500 मासिक भत्ता देने का वादा किया गया है।स्वास्थ्य सेवाएं:आप (AAP):बुजुर्गों के लिए अनलिमिटेड मुफ्त इलाज का वादा किया गया है।बीजेपी (BJP):70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को ₹10 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।कांग्रेस (Congress):₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।ऑटो चालकों और मजदूरों के लिए वादे:बीजेपी:ऑटो चालकों के लिए वेलफेयर बोर्ड का गठन।₹10 लाख का जीवन बीमा।आप: ऑटो चालकों के लिए भी विशेष योजनाओं का दावा किया गया है, हालांकि इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।एलपीजी, बिजली और पानी:आप (AAP):मुफ्त बिजली और पानी की योजनाओं को जारी रखने का वादा।एलपीजी सिलेंडर पर कोई नई घोषणा नहीं।बीजेपी (BJP):₹500 में एलपीजी सिलेंडर।होली और दिवाली पर मुफ्त सिलेंडर।कांग्रेस (Congress):₹500 में एलपीजी सिलेंडर।300 यूनिट बिजली मुफ्त।दलित और जरूरतमंद छात्रों के लिए:आप (AAP):आंबेडकर स्कॉलरशिप योजना दलित छात्रों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।बीजेपी (BJP):हर जरूरतमंद छात्र को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा।कांग्रेस (Congress):आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए विशेष छात्रवृत्ति और अन्य योजनाएं।विश्लेषकों का मानना है कि ‘मुफ्त’ योजनाओं की होड़ से जनता को कुछ समय के लिए राहत तो मिलेगी, लेकिन इसका प्रभाव सरकार के खजाने पर भारी पड़ सकता है। सवाल यह है कि क्या ये योजनाएं दीर्घकालिक रूप से लाभकारी साबित होंगी, या फिर यह सिर्फ चुनावी राजनीति तक ही सीमित रहेंगी। ]]></description>
                <pubDate>Wed, 22 Jan 2025 23:09:00 +0530</pubDate>
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