देवरिया लोकसभा सीट-हैट्रिक लगाने की जुगत में बीजेपी लेकिन अभी तक प्रत्याशी तय नहीं
Ramapati Ram Tripathi
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देवरिया जिले की सदर सीट पर लगभग सभी प्रमुख दलों ने नुमाइंदगी की है। इस सीट पर सबसे अधिक बार कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा है। लेकिन बीते कुछ चुनावों से पार्टी की हालत खस्ता है और 40 साल से कांग्रेस पार्टी को इस सीट पर एक अदद जीत का इंतजार है। वहीं अपने सोशल इंजीनियरिंग के बलबूते बहुजन समाज पार्टी ने भी इस सीट पर विजय श्री दर्ज़ की है। कांग्रेस पार्टी के बाद सबसे अधिक समाजवादियों ने इस सीट पर अपनी विजय पताका फहराई है।

Ramapati Ram Tripathi

बीते दो लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को यहां लगातार जीत मिली है। हालांकि लगातार दो जीत दर्ज़ करने वाली बीजेपी के अंदर खाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वर्ष 2014 के आम चुनाव में यहां के स्थानीय और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठतम मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस सीट से अपना दावा किया था। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और निवर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनकी अदावत जग जाहिर है। राजनाथ सिंह ने सारे दावों की हवा निकालते हुए वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा को देवरिया सदर सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया। टिकट की आस लगाए सूर्य प्रताप शाही समेत स्थानीय दावेदारों को निराशा हाथ लगी। कलराज मिश्र जैसे हैवीवेट नेता के सामने जिले के दावेदार कोई विरोध नहीं कर पाए। नतीजन कलराज मिश्र ने मोदी लहर में शानदार जीत दर्ज़ कर मोदी मंत्रिमंडल में भी जगह बनाई।

पार्टी ने शरद त्रिपाठी का काट दिया टिकट 

कलराज मिश्र का कार्यकाल बीतने पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व फिर स्थानीय दावेदारों ने शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी पेश की और लखनऊ से दिल्ली की परिक्रमा शुरु कर दी। तभी संतकबीर नगर जिले की मेंहदावल सीट से विधायक रहे राकेश सिंह बघेल और तत्कालीन सांसद शरद त्रिपाठी (अब स्वर्गीय) के बीच जूता कांड हो गया। पार्टी के लिए चुनाव निकट होने से बड़ी ही असहज स्थिति हो गई।

2019 में डॉ रमापति राम त्रिपाठी ने दर्ज की जीत

पार्टी ने शरद त्रिपाठी का टिकट काटकर उनके पिता और बीजेपी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रहे डॉ रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया सदर से टिकट दे दिया। आम चर्चा है कि डॉ रमापति राम त्रिपाठी के टिकट में राजनाथ सिंह की प्रभावी पैरवी रही। जूता कांड के बाद क्षत्रिय बिरादरी से विरोध की आशंका में आए डॉ रमापति राम त्रिपाठी को वर्ष 2019 के आम चुनाव में क्षत्रियों ने खुलकर मदद की। नतीजन भाजपा ने यहां जबरदस्त जीत दर्ज़ की। समीकरण सेट करने के लिए यहां भेजे गए डॉ रमापति राम त्रिपाठी ने जहां फिर से अपनी दावेदारी के लिए लखनऊ से दिल्ली तक अपनी पैरवी कर रहे हैं।

कई चरणों की टिकट घोषणा के बाद भी देवरिया सदर की सीट होल्ड पर

वहीं स्थानीय दावेदार मायूस हैं। कई चरणों की टिकट घोषणा के बाद भी देवरिया सदर की सीट होल्ड पर है। वहीं पड़ोस की तीनों सीटों पर निवर्तमान सांसद टिकट पाने में कामयाब रहे। एक तरफ़ पार्टी निर्णय को सर्वोपरि बताने वाले निवर्तमान सांसद उम्मीदों की टकटकी लगाए हैं। वहीं स्थानीय दावेदार फिर से बाहरी दावेदार की चर्चा होते ही मायूस हो जा रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी बाहरी प्रत्याशियों के थोपे जाने को लेकर अंदर खाने नाराजगी है।

जब तक स्थानीय दावेदारों को तरजीह नहीं मिलेगी, तब तक जिले के विकास की बात बेमानी है। बाहरी नेता जब तक यहां की समस्याओं, इतिहास- भूगोल को समझते हैं, पांच साल पूरे हो जाते हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को सोंचना चाहिए कि आखिर कब तक स्थानीय दावेदार दरी बिछाते रहेंगे। वहीं इसके विपरीत आत्मविश्वास से लबरेज भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार की उपलब्धियों की बदौलत प्रत्याशी चाहें जो हो पार्टी हैट्रिक जीत दर्ज़ करेगी।


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